अक्टूबर में रिटेल मुद्रास्फीति की दर 0.25% और नवंबर में बढ़कर 0.71% हो गई है। यह भी नहीं हुआ होता, अगर नवंबर में साल भर पहले से सोने के दाम 58.32% और चांदी के दाम 65.52% नहीं बढ़ गए होते। आप रोते रहिए कि दो महीने में एक दर्जन अंडे का भाव 66 रुपए से 39.39% बढ़कर 92 रुपए हो गया। लेकिन सरकार कहेगी कि अंडा साल भर पहले से 5.2% ही महंगा हुआ है। आईएमएम जैसा अंतरराष्ट्रीय संस्थान भी रो रहा है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) की बास्केट आउटडेटेड या पुरानी पड़ चुकी है और लोगों के मौजूदा खर्च को सही तरीके से नहीं दिखाती। इसकी गणना का आधार वर्ष 13-14 साल पुरानी 2011-12 का रखना सरासर देश और दुनिया की आंखों में धूल झोंकना है। लेकिन भारत सरकार के सांख्यिकी व कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय और हमारी वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि जीडीपी और सीपीआई के आधार वर्ष को दुरुस्त करके 2022-23 किया जा रहा है और दोनों के डेटासेट की नई सीरीज़ साल 2026 के मध्य तक आ जाने की उम्मीद है। तब तक देश के 146 करोड़ लोग शांत रहें और ‘जाहे विधि राखे राम, ताहे विधि रहिए’ का जाप करते हुए मोदी सरकार का गुणगान करते रहें। अब मंगलवार की दृष्टि…
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