अमेरिका की शर्तों पर व्यापार संधि करने की यह कैसी मजबूरी है कि खुद को राष्ट्रवादी बताने वाली मोदी सरकार देश के कानूनों को भी धता बताने में जुट गई है। वो पिछली गली से अमेरिका की जीएम फसलों को गुपचुप भारत में घुसा रही है। भारत में बीटी कॉटन के अलावा कोई भी जेनेटिकली मोडिफाइड (जीएम) फसल आयात नहीं की जा सकती है। अमेरिका में भुट्टे व मक्के से लेकर सोयाबीन तक प्रमुख जीएम फसलें हैं जिन्हें वो भारत में खपाना चाहता है। जीएम सोयाबीन सोया तेल बनकर भारत में आएगा। जीएम भुटटे के विकल्प के रूप में वो नॉन-जीएम लाल ज्वार को पशु आहार बोलकर भारत में खपाएगा। साथ ही अमेरिका डिस्टिलर्स ड्रायड ग्रेन्स विद सोल्युएबल्स (डीडीजीएस) भारत में बेचने जा रहा है। इसके ज़रिए वो परोक्ष या छिपे तौर पर जीएम मक्के और चावल को भारत में ज़ीरो टैरिफ पर डम्प करने में लगा है। जीएम मक्के से डीजीजीएस निकलता है। इसमें मोटे तौर पर 70% स्टार्च, 8-10% प्रोटीन, 3-4% तेल और बाकी भूसी होती है। इससे डिस्टिलेशन की प्रक्रिया में फर्मेंटेशन के बाद शुद्ध इथेनॉल बना लिया जाता है। बाकी जो गीला फर्मेंटेड अनाज का गूदा बचता है, उसे सुखाकर डीडीजीएस बना लिया है। जीएम चावल से भी इसी तरह डीडीजीएस बनता है। ये सब अब पशु आहार के रूप में भारत में धड़ल्ले से आएंगे। अब गुरुवार की दशा-दिशा…
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