मोदी सरकार एक डरी हुई सरकार है। यह येनकेन प्रकारेण ऊपर से लेकर नीचे तक सत्ता के समूचे तंत्र पर कब्जा करना चाहती है। इसलिए नहीं कि इसे देश का विकास करना है, बल्कि इसलिए कि इसे अपने यारों का भला और जनधन की अबाध लूट से अपनी पार्टी व संघी तंत्र का खजाना भरते रहना है। हर खास-ओ-आम को फिर भी उम्मीद है कि सरकार बजट में आर्थिक विकास, रोज़गार सृजन और उपभोक्ता मांग बढ़ाने के उपाय करेगी। लेकिन सरकारी खज़ाने से वोट आधार जुटाने व बढ़ाने की अंधी दौड़ में लगी सरकार ऐसा कैसे कर सकती है? वो देश की लगभग 56% आबादी (81.35 करोड़) गरीबों को हर महीने पांच किलो मुफ्त राशन देने पर ₹2,03,420 करोड़ की सब्सिडी खर्च करती है। सरकार जब दावा करती है और विश्व बैंक उसकी तस्दीक भी करता है कि भारत में अतिशय गरीब 2022-23 से ही आबादी के 5.3% ऱह गए हैं तो 56% आबादी को वो मुफ्त राशन क्यों दिए जा रही है? ₹2.03 लाख करोड़ की सब्सिडी देकर वो किसको 420 बना रही है? क्या यह वोट खरीदने का गंदा धंधा नहीं? इसी तरह वो ₹1.68 लाख करोड़ की खाद सब्सिडी दे रही है। वो भी तब, जब समूचे कृषि व किसान कल्याण मंत्रालय का बजट ही ₹1.38 लाख करोड़ का है। क्या खाद सब्सिडी सीधे किसानों के बैंक खाते में नहीं ट्रांसफर की जा सकती? अब शुक्रवार का अभ्यास…
यह कॉलम सब्सक्राइब करनेवाले पाठकों के लिए है.
'ट्रेडिंग-बुद्ध' अर्थकाम की प्रीमियम-सेवा का हिस्सा है। इसमें शेयर बाज़ार/निफ्टी की दशा-दिशा के साथ हर कारोबारी दिन ट्रेडिंग के लिए तीन शेयर अभ्यास और एक शेयर पूरी गणना के साथ पेश किया जाता है। यह टिप्स नहीं, बल्कि स्टॉक के चयन में मदद करने की सेवा है। इसमें इंट्रा-डे नहीं, बल्कि स्विंग ट्रेड (3-5 दिन), मोमेंटम ट्रेड (10-15 दिन) या पोजिशन ट्रेड (2-3 माह) के जरिए 5-10 फीसदी कमाने की सलाह होती है। साथ में रविवार को बाज़ार के बंद रहने पर 'तथास्तु' के अंतर्गत हम अलग से किसी एक कंपनी में लंबे समय (एक साल से 5 साल) के निवेश की विस्तृत सलाह देते हैं।
इस कॉलम को पूरा पढ़ने के लिए आपको यह सेवा सब्सक्राइब करनी होगी। सब्सक्राइब करने से पहले शर्तें और प्लान व भुगतान के तरीके पढ़ लें। या, सीधे यहां जाइए।
अगर आप मौजूदा सब्सक्राइबर हैं तो यहां लॉगिन करें...
