खाद्य मुद्रास्फीति तीन महीने बाद छज्जे से नीचे, दहाई से इकाई में

हमारे नीति-नियामकों के लिए थोड़े सुकून की बात है कि तीन महीने बाद खाद्य मुद्रास्फीति की दर अब दहाई से इकाई अंक में आ गई है। 26 फरवरी को खत्म हफ्ते में इसकी दर 9.52 फीसदी दर्ज की गई है जबकि इसके ठीक पिछले हफ्ते में यह 10.39 फीसदी पर थी। इस तरह इनमें 87 आधार अंकों की कमी आ गई है। एक आधार अंक या बेसिस प्वाइंट का मतलब 0.01 फीसदी होता है। इन आंकड़ों से निश्चित रूप से वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी और रिजर्व बैंक गर्वनर डी सुब्बाराव दोनों ने तात्कालिक चैन की सांस ली होगी।

वैसे, आंकड़ों के घटने का यह करिश्मा दाल, गेहूं व आलू के दाम घटने से हुआ है। इन्हीं की बदौलत दिसंबर के पहले हफ्ते से लगातार दस फीसदी से ऊपर चल रही खाद्य मुद्रास्फीति की दर अब दस से नीचे आई है। इससे पहले आखिरी बार यह 4 दिसंबर 2010 को समाप्त सप्ताह में इकाई अंक में थी और इसकी दर 9.46 फीसदी दर्ज की गई थी। इसके बाद तो यह एक समय 18 फीसदी से भी ऊपर निकल गई थी।

सरकार द्वारा गुरुवार को जारी आंकड़ों के अनुसार 26 फरवरी को समाप्त सप्ताह में गेहूं, दाल और आलू के दाम क्रमशः 1.07 फीसदी, 3.91 फीसदी और 8.96 फीसदी नीचे आ गए। हालांकि, सालाना तुलना में प्याज और अन्य सब्जियों के दाम ऊंचे ही बने रहे। चावल, अंडा, मांस और मछली महंगी हुई। फलों के भी दाम ऊंचे बोले गए। अखाद्य वस्तुओं के दाम ऊंचे रहे। ईंधन और बिजली समूह में 9.48 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। इस समूह में पेट्रोल के दाम 23.14 फीसदी बढ़ गए।

जानकारों की राय में खाद्य मुद्रास्फीति के नीचे आने के बावजूद रिजर्व बैंक मौद्रिक आपूर्ति को कसने की कोशिश में ढील नहीं दे सकता क्योंकि दूसरी आवश्यक चीजों के दाम अब भी ऊंचे बने हुए हैं। खासकर कच्चे तेल में विश्व स्तर पर आग लगी हुई है। पिछले ही हफ्ते रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर सुबीर गोकर्ण ने कहा था कि कच्चे तेल के ऊंचे दाम से मुद्रास्फीति से निपटने की रणनीति पर दबाव बढ़ जाएगा।

दिल्ली के एक संस्थान, इंस्टीट्यूट ऑफ इकनॉनिक ग्रोथ की अर्थशास्त्री बसंता प्रधान का कहना है, “खाद्य मुद्रास्फीति नीचे आ गई है। लेकिन मध्य-पूर्व के राजनीतिक घटनाक्रमों के चलते ईंधन की मुद्रास्फीति बढ़ सकती है। मुझे उम्मीद है कि रिजर्व बैंक अगले हफ्ते नीतिगत दरों (रेपो व रिवर्स रेपो) में 0.25 फीसदी वृद्धि कर देगा।” रिजर्व बैंक अगले हफ्ते आज ही के दिन 17 मार्च को चौथी तिमाही की मध्य-समीक्षा पेश करनेवाला है।

रिजर्व बैंक के हिसाब से मुद्रास्फीति को लेकर तभी निश्चिंत हुआ जा सकता है जब सकल मुद्रास्फीति की दर 4 से 5 फीसदी पर आ जाए। लेकिन जनवरी 2011 में यह 8.23 फीसदी रही है। इसी के मद्देनजर मार्च 2011 के लिए रिजर्व बैंक ने मुद्रास्फीति का अनुमान 5.5 फीसदी से बढ़ाकर 7 फीसदी कर दिया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published.