वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा है कि मुद्रास्फीति को स्वीकार्य स्तर पर लाना जरूरी है और रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दर आधा फीसदी बढ़ाने से मुद्रास्फीति की अपेक्षा को थामने में मदद मिलेगी। उन्होंने मौद्रिक नीति की पहली तिमाही समीक्षा की पहल पर टिप्पणी करते हुए कहा कि रिजर्व बैंक ने रेपो दर को 7.50 फीसदी से 8 फीसदी कर मंहगाई में और कमी लाने का ठोस संकेत दिया है।
वित्त मंत्री ने कहा कि इस नीतिगत फैसले से उम्मीद की जा सकती है कि चालू वित्त वर्ष 2011-12 के अंत तक महंगाई का स्तर 6 से 7 फीसदी के बीच आ जाएगा। उन्होंने कहा कि हाल के महीने में महंगाई खासतौर पर खाद्य महंगाई दर कुछ कम हुई है, लेकिन गैर-खाद्य वस्तुओं की महंगाई बढ़ने से मुख्य मुद्रास्फीति की दर अब तक 9 फीसदी के आसपास बनी हुई है। यह स्थिति 2011-12 की पहली छमाही तक के लिए रिजर्व बैंक के अनुमान के मुताबिक है।
श्री मुखर्जी ने कहा कि 2011-12 की पहली तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर घटी है। औद्योगिक उत्पाद सूचकांक और ब्याज दर के प्रति संवेदनशील उद्योगों की विकास दर में कमी आई है। इसके बावजूद जीडीपी में वृद्धि दर अब तक 2010-11 में हासिल रफ्तार से ज्यादा भिन्न नहीं है।
