बजट से उद्योगों से लेकर आम लोगों और शेयर बाज़ार तक को बड़ी उम्मीदें हैं। सबको रियायत या टैक्स में छूट की आस। हालांकि समस्याएं विकट हैं। मैन्यूफैक्चरिंग पस्त है। जीडीपी में जो 12-14% मैन्यूफैक्चरिंग है, उसका बड़ा हिस्सा चीन को आउटसोर्स कर दिया गया है। फिर भी बजट में मैन्यूफैक्चरिंग को बढ़ाने का शोर तो होगा ही। लेकिन हर स्तर पर फैले भ्रष्टाचार का जिक्र तक करना वित्त मंत्री उचित नहीं समझेंगी। उनके लिए तो हर तरफ ‘ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस’ चल रहा है। हो सकता है कि शेयर बाज़ार को खुश करने के लिए इस बार सिक्योरिटीज़ ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) खत्म करने का पटाखा फोड़ दिया जाए। वैसे भी इससे साल भर में ₹55,000 करोड़ ही मिलते रहे हैं। बाकी, कैपिटल गेन्स टैक्स में किसी छूट की कोई उम्मीद नहीं है। सरकार अपनी पीठ ज़रूर जमकर थपथपाएगी क्योंकि वो राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 4.4% तक सीमित रखने में सफल हो सकती है, वो भी तब हमारे जीडीपी की नॉमिनल विकास दर 10.1% के बजट अनुमान के बजाय 8% तक सिमट गई है। कारण, 2024-25 में जीडीपी का अनंतिम अनुमान ₹324.11 लाख करोड़ के बजाय ₹330.68 लाख करोड़ रहा है। वो 8% बढ़कर भी ₹357.14 लाख करोड़ हो रहा है जो ₹356.98 लाख करोड़ के बजट अनुमान के लगभग बराबर है। अब करते हैं आज के बजट का प्रस्थान…
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