एक्सपर्टों की बात शोर है, सच नहीं

अर्थशास्त्र और फाइनेंस ही नहीं, किसी भी क्षेत्र के विशेषज्ञों के साथ बुनियादी समस्या यह है कि वे नहीं जानते कि वे क्या नहीं जानते। आत्ममोह और विभ्रम में वे देख नहीं पाते कि उनकी सोच के दायरे के बाहर बहुत कुछ छूटा हुआ है। मानव ज्ञान के विकास में, दूसरे विषय तो छोड़िए, साइंस तक के बारे में पिछली दो सदियों में बार-बार कहा गया कि अब तक जो जानना था, जाना जा चुका है। आगे तो बस व्याख्या ही होनी है। लेकिन उसके बाद सापेक्षता और क्वांटम सिद्धांत ने दिखा दिया कि अब तक जो हुआ था, वो कितना अधूरा था।

जो चीजें कमोबेश स्थिर हैं, जहां ज्यादा नया कुछ नहीं होता, वहां तो विशेषज्ञों की भविष्यवाणियां चल जाती हैं। लेकिन शेयर बाज़ार जैसे मसलों में, जहां पल-पल संतुलन बदलता है, जहां पहले से पता नहीं होता कि आगे क्या होने जा रहा है और बाज़ार में सक्रिय लोग उसे भावनाओं व बुद्धि के स्तर पर किस तरह लेंगे, वहां विशेषज्ञ हर दिन मुंह की खाते हैं। यह भारत ही नहीं, सारी दुनिया का सच है क्योंकि यह विशेषज्ञता की इन-बिल्ट खराबी है। और, ऐसा भी नहीं कि इसमें विशेषज्ञों का दोष है और कोई अच्छा विशेषज्ञ चाहे तो इसे दूर कर सकता है, बल्कि सारा लफड़ा अनिश्चितता का है जिसे कभी मिटाया नहीं जा सकता है।

इसलिए कौन-सा स्टॉक कहां जाएगा, निफ्टी यहां से कहां तक जा सकता है, इस मसले पर टेलिविजन चैनलों, अखबारों या वेब पर एनालिस्टों की राय के पीछे भागना समय की बरबादी और खुद को धोखा देना है। आप किसी भी एनालिस्ट का ट्रैक रिकॉर्ड रखिए और खुद के कुछ भी तार्किक-से दिखनेवाले अनुमानों की टेबल बनाते जाइए। अक्सर आप पाएंगे कि आप जैसा सामान्य इंसान अनुमानों की सटीकता या गलत होने के मामले में किसी भी तरह से विशेषज्ञ से कमतर नहीं है। विशेषज्ञों की तो दुकानदारी है जो उन्हें चलानी है। स्टेशन या कचेहरी के पास टाट बिछाकर तोते से भविष्य बंचवाते या हाथ देखकर भविष्यवाणी करते पंडितों और चैनलों पर आनेवाले स्टॉक एनालिस्टों की जात मूलतः एक है।

ऐसे में शेयर बाज़ार का ट्रेडर करे तो क्या करे? क्या अंधेरे में तीर मारता रहे? लग गया तो तीर नहीं तो तुक्का! ट्रेडिंग में कामयाबी का सूत्र कहता है कि इस पर दिमाग ही मत लगाओ कि बाज़ार कहां जाएगा। सारा ध्यान इसे समझने में लगाओ कि ठीक इस वक्त बाज़ार जा कहां रहा है। कोई स्टॉक कहां जाएगा और कहां जा रहा है, दोनों बातों में बारीक फर्क है। लेकिन इनके नतीजों में भारी अंतर आ जाता है। अगर आप यह देख रहे हैं कि बाज़ार कहां जा रहा है तो ज़रा-सी आहट मिलते ही आप रख पलट सकते हैं। वहीं, जब आप ताल ठोंककर बैठते हैं कि बाज़ार यहां जाएगा, तब आत्ममोह और अहंकार आपको अपनी स्थिति छोड़ने नहीं देता। जब तक आपको समझ में आता है, तब तक आपकी ट्रेडिंग पूंजी में तगड़ी सेंध लग चुकी होती है।

प्रोफेशनल ट्रेडर कभी भी इस चक्कर में नहीं पड़ते कि निफ्टी आगे यहां से 4800 तक जाएगा या उठकर 7800 तक। उनकी नज़र बस इस पर रहती है कि बाज़ार या कोई स्टॉक अभी जा कहां रहा है; साल, महीने, हफ्ते, दिन व घंटे का चार्ट उस स्टॉक के भाव की क्या गति दिखा रहा है; इसके बाद, सबसे बड़ी बात, वो पता चलाने की कोशिश करता है कि अभी बैंक, म्यूचुअल फंड व बीमा कंपनियां (डीआईआई) और विदेशी निवेशक संस्थाएं (एफआईआई) क्या करने जा रही हैं; इनके अलावा प्रवर्तक और ब्रोकरेज फर्मों का क्या रुख रख सकता है।

सौ फीसदी गारंटी के साथ कोई नहीं जान सकता है कि इन मसलों में ठीक-ठाक क्या होगा। लेकिन चार्ट पर यह जानने का सलीका ज़रूर है कि क्या होने की अधिकतम संभावना है। प्रोफेशनल ट्रेडर संभावना के न पूरी होने पर स्टॉप लॉस के तरीके से रिस्क प्रबंधन भी करता है। दुनिया में अभी तक कोई ट्रेडर नहीं हुआ जिसने बहुत सारे सौदों में घाटा न उठाया हो। लेकिन सही रिस्क प्रबंधन से घाटा उठाने के बाद भी लाखों ट्रेडर हैं जो इसी से रोज़ी-रोटी ही नहीं चलाते, बल्कि करोड़ों में खेलते हैं।

मित्रों! इस हफ्ते लगातार सफर करता रहा। लखनऊ जैसे महानगर से लेकर सुदूर देहात के अपने गांव तक। राजनीति, समाज, परिवार। खेती-किसानी। सबको छूता हुआ गुजरता रहा। ऊपर से आने-जाने में भंयकर भीड़ के बीच भारतीय रेल की मेहमाननवाज़ी! लेकिन आपकी सोच को निरंतर सक्रिय करने के काम में कोई रेफ नहीं आने दी। सीखना और ज्ञान एक अनवरत प्रक्रिया है। जो भी चीज चलायमान है, उसमें कल क्या होगा, कोई नहीं जानता। उसे जानने के चक्कर में पड़ना भी नहीं चाहिए क्योंकि अगर आप ऐसा करते हैं तो इससे एनालिस्टों और भविष्यवक्ताओं की दुकान तो चल जाएगी। पर आपका केवल और केवल नुकसान होगा। इसलिए सतर्क रहिए और जो भी, जैसा भी सामने आए, उससे निपटने के लिए तैयार रहिए। अपने सोच को बदलते और विकसित करते रहिए। पीछे मुड़-मुड़कर नहीं, हमेशा अगल-बगल और आगे देखकर चलने की आदत डालिए। और हां, कभी भी एक्सपर्टों के भौकाल में मत आइए क्योंकि कल क्या होगा, इसका अंदाज़ लगाने में आपके पास या फेल होने का चांस एकदम उनके बराबर, यानी फिफ्टी-फिफ्टी का है।

2 Comments

  1. sir,
    agar hum Tuesday se enter kare to hum ko month ka pura paise dena pade ga, ya fir jiss deen se enter kare ussi deen se laga ga. plz advise me here.

  2. Author

    जावेद भाई, सेवा एक महीने से कम के लिए नहीं है। लेकिन आपका भुगतान जिस दिन अर्थकाम के खाते में आ जाएगा, उसी दिन से अगला महीना शुरू होगा। मान लीजिए, 25 जून को भुगतान मिला तो 24 जुलाई तक महीना गिना जाएगा।
    वैसे, आप ट्रेडर हैं और आप बाज़ार के ऊंच-नीच को काफी हद तक समझते हैं, खटाखट खुद फैसला लेने में सक्षम हैं तभी यह सेवा सब्सक्राइब करें। नहीं तो इसका फायदा नहीं उठा पाएंगे।
    आम निवेशकों के लिए लांग टर्म निवेश की सुरक्षित सेवा हम पहली जुलाई से अलग से शुरू कर रहे हैं। इसमें महीने की फीस 200 रुपए और साल भर की 2000 रुपए है। अगर आप निवेशक हैं तो आपके लिए वो सेवा ज्यादा लाभकारी होगी क्योंकि ट्रेडिंग में रिस्क ज्यादा है जिसे मैं या कोई भी बाहर से नहीं संभाल सकता।

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