दुनिया भर के आर्थिक व वित्तीय जगत में अनिश्चितता छाई है। रूस-यूक्रेन युद्ध ने तीन साल से उथल-पुथल मचा रखी है। मध्य-पूर्व अब भी शांत नहीं हुआ है। ऊपर से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने टैरिफ का नया बखेड़ा खड़ा कर रखा है। उम्मीद थी कि अलास्का में ट्रम्प-पुतिन मुलाकात से कुछ ठोस नतीजा निकलेगा। लेकिन अब यूरोपीय संघ तक अलग भाग रहा है। इन सबका असर भारत पर भी पड़ रहा है। सबसे तेज़ गति और पांचवीं से चौथी व तीसरी अर्थव्यवस्था बन जाने के तमाम सरकारी दावों के बावजूद आर्थिक व वित्तीय जगत में हर तरफ अनिश्चितता छाई है। शेयर बाज़ार हलकान और बौराया हुआ है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक तो भाग ही रहे थे। अब लिस्टेड कंपनियों के प्रवर्तक तक शेयरधारिता घटाने लगे हैं। एक अध्ययन के मुताबिक उनकी शेयरधारिता इस समय आठ साल के न्यूनतम स्तर पर है। जून तिमाही में प्रवर्तकों ने कंपनियों के ₹54,700 करोड़ के शेयर बेचे हैं। कुछ प्रवर्तक शेयरधारिता बढ़ा भी रहे हैं। ऐसे में लम्बे समय की सोच वाले निवेशक को घबराने के बजाय समभाव या समता भाव रखना होगा। दिल व दिमाग जितना शांत रहेगा, हम बाज़ार में उभरते अवसरों को उतना ही साफ देख सकेंगे। अब तथास्तु में आज की कंपनी…
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