भावों के चार्ट से कैसे पता लगाया जा सकता है कि किस स्टॉक में किस भाव पर देशी-विदेशी संस्थाओं की खरीद/बिक्री आ सकती है, उसमें डिमांड/सप्लाई का ज़ोन क्या है? लेकिन इस बारीकी में जाने से पहले समझ लें कि फ्लोटिंग स्टॉक कमोबेश स्थिर रहने पर भी किसी शेयर के भाव बढ़ते या गिरते क्यों हैं? बाज़ार में किसी दिन जितने शेयर बेचे जाते हैं, उतने ही खरीदे जाते हैं। हां, ट्रेड हुए शेयरों में डिलीवरी वाले शेयरों का प्रतिशत कम-ज्यादा होता रहता है। दिमाग में कहीं गहरे बैठा लें कि जब किसी शेयर को खरीदने की आतुरता ज्यादा रहती है तो बेचनेवाले इसका फायदा उठाते हैं और उस शेयर के भाव उस दिन बढ़ जाते हैं। लेकिन अगले दिन हो सकता है कि पिछले ही दिन का बड़ा व लम्बा ग्रीन कैंडल मुनाफावसूली या गिरावट का सबब बन जाए। अब सोमवार का व्योम…
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