डोनाल्ड ट्रम्प ने मागा (मेक अमेरिका ग्रेट अगेन) का नाम लेकर टैरिफ-टैरिफ की चिल्ल-पों और अपने दूसरे कर्मों से अमेरिका को बर्बादी की ढलान पर डाल दिया है। वहीं, चीन अपनी मैन्यूफैक्चरिंग के दम पर विश्व विजय के अभियान पर निकल पड़ा है। उसने कनाडा से आयात होनेवाले कैनेला के बीजों पर टैरिफ 84% से घटाकर 15% करने के बदले वहां निर्यात की जानेवाली इलेक्ट्रिक कारों पर टैरिफ 100% से घटवा कर मात्र 6.1% करा लिया। चीनऔरऔर भी

हमारे शेयर बाज़ार का मूल्यांकन बहुत चढ़ा हुआ है। दुनिया में अमेरिका को छोड़ दें तो चीन व हांगकांग से लेकर यूरोप, जापान, ऑस्ट्रेलिया व ब्राज़ील तक के बाज़ार पी/ई अनुपात के पैमाने पर भारत से बहुत सस्ते हैं। क्या यह विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के भारत से पलायन की प्रमुख वजह नहीं है? क्या आपको नहीं लगता कि भारतीय शेयर और वहां ट्रेड हो रही तमाम अच्छी कंपनियों के शेयरों का मूल्यांकन बहुत ज्यादा है? यहऔरऔर भी

ट्रम्प के 50% टैरिफ लगाने का हल्ला मचाया जा रहा है। 500% टैरिफ तक की बात कही जा रही है। लेकिन हकीकत यह है कि भारत के निर्यात में टैरिफ से बड़ी समस्याएं आंतरिक हैं। 25 नवंबर 2025 को बोर्ड ऑफ ट्रेड की बैठक में देश के विभिन्न राज्यों से आए निर्यातकों से खुद वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल से शिकायत की कि उन्हें कच्चा माल वैश्विक कीमतों से 15-20% महंगा मिलता है। बहुत सारे राज्यों में मालऔरऔर भी

अमेरिका से लेकर ब्रिटेन और जर्मनी तक, दुनिया के तमाम देश अपने हितों को सबसे ऊपर रखकर भारत से व्यापार वार्ता और संधि कर रहे हैं। चीन तक अपने उद्योगों के हित में भारत का इस्तेमाल कर रहा है। लेकिन भारत का हित आज हाशिए पर पड़ा है क्योंकि यहां करीब 12 सालों से ऐसी सरकार चल रही है जिसके लिए भारत का हित मतलब अडाणी जैसे उन चंद यारों का हित हो गया है जो उसेऔरऔर भी