हमारे शेयर बाज़ार का मूल्यांकन बहुत चढ़ा हुआ है। दुनिया में अमेरिका को छोड़ दें तो चीन व हांगकांग से लेकर यूरोप, जापान, ऑस्ट्रेलिया व ब्राज़ील तक के बाज़ार पी/ई अनुपात के पैमाने पर भारत से बहुत सस्ते हैं। क्या यह विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के भारत से पलायन की प्रमुख वजह नहीं है? क्या आपको नहीं लगता कि भारतीय शेयर और वहां ट्रेड हो रही तमाम अच्छी कंपनियों के शेयरों का मूल्यांकन बहुत ज्यादा है? यहऔरऔर भी