कैसा राष्ट्र-निर्माण, हो रहा राष्ट्र-विनाश!
2026-01-09
किसी भी देश का बनना-बिगड़ना उसके प्राकृतिक व मानव संसंधनों के कुशल नियोजन पर निर्भर करता है। यही राष्ट्र-निर्माण का बुनियादी आधार है। भारत के पास तो पांच हज़ार पुरानी सभ्यता की समृद्ध विरासत भी है। लेकिन जिस तरह मोदी सरकार बारह सालों से देश के प्राकृतिक संसाधनों को अडाणी व अम्बानी जैसे चंद यारों के हवाले करती जा रही है और उसने 81.35 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन, दस करोड़ किसानों को सरकारी अनुदान, 11 करोड़औरऔर भी

