अंधेर नगरी चौपट राजा, डेटा बना बाजा
अमेरिका में मुद्रास्फीति की दर इस साल अगस्त में 2.9% और सितंबर में 3% रही है। अक्टूबर में सरकार के शटडाउन के चलते डेटा नहीं जारी हुआ, जबकि नवंबर का डेटा 18 दिसंबर को आएगा। चीन में मुद्रास्फीति की दर अक्टूबर में 0.2% और नवंबर में 0.7 रही है। जापान में मुद्रास्फीति सितंबर में 2.9% और अक्टूबर में 3% रही है। जर्मनी में मुद्रास्फीति की दर सितंबर में 2.4%, अक्टूबर में 2.3% और नवंबर में भी 2.3%औरऔर भी
सावधान! बाज़ार रेड नहीं, पिंक ज़ोन में
साल 2025 का आखिरी महीना। इसी महीने के पहले दिन बीएसई सेंसेक्स 86,159.02 और एनएनई निफ्टी 26,325.80 के नए ऐतिहासिक शिखर पर पहुंच गया। उसके बाद से मुनाफावसूली जारी है। फिर भी इस वक्त सेंसेक्स 23.26 और निफ्टी 22.68 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है। पी/ई अनुपात ही मूलतः वो पैमाना है जिससे पता चलता है कि कोई स्टॉक या सूचकांक, मतलब बाज़ार महंगा है या नहीं। निफ्टी का पी/ई अनुपात 20 से नीचे रहताऔरऔर भी
सरकार माई-बाप, जीडीपी तक उसका!
जीडीपी का डेटा ऊपर-ऊपर जैसा दिखाता है, अंदर घुसने पर पता चलता है कि वैसा कतई नहीं है और हकीकत बड़ी दारुण है। आखिर जीडीपी का बढ़ना और निजी क्षेत्र के घटिया प्रदर्शन एक साथ कैसे? जीडीपी में निजी क्षेत्र से जुड़े दो सबसे बड़े हिस्से हैं पीएफसीई (प्राइवेट फाइनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर) या निजी खपत पर होनेवाला खर्च और निजी क्षेत्र का पूंजी निवेश। निजी खपत बढ़ती है तो निजी पूंजी निवेश भी बम-बम करता है। लेकिनऔरऔर भी
निवेशकों के साथ ऐसा धोखा कब तक!
संयोग या प्रयोग से सत्ता में हाथ में आ जाए और लोकतांत्रिक संस्थाओं को पंगु बनाकर येनकेन प्रकारेण सत्ता में बने रहने की सिद्धि हासिल कर ले तो किसी भी सत्ताधारी दल को गुमान हो जाता है कि वो भोलेभाले आम लोगों को ही नहीं, मीडिया से लेकर बुद्धिजीवियों व अर्थशास्त्रियों तक को चरका पढ़ा सकता है। लेकिन इतिहास गवाह है कि ऐसा कभी लम्बे समय तक नहीं चलता। शासन की नंगई एक न एक दिन सबसेऔरऔर भी






