भारतीय बैंक इस समय 20 सालों की सबसे विकट डिपॉजिट समस्या से जूझ रहे हैं। इस समय क्रेडिट-डिपॉजिट या सीडी अनुपात 80% हो चुका है जो साल 2005 के बाद से अब तक का उच्चतम स्तर है। सीडी अनुपात दिखाता है कि बैंकों का कितना डिपॉजिट ऋण देने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। हमारे बैंक बीते वित्त वर्ष 2023-24 में डिपॉजिट खींचने के लिए जूझते रहे। हालत यह है कि लोगबाग होम लोन से लेकरऔरऔर भी

प्रधानमंत्री के पद पर बैठा कोई शख्स आर्थिक मसलों पर झूठ बोलने लग जाए तो तीन साल में भारत को दुनिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था और 2047 तक विकसित देश बनाने का संकल्प महज चुनावी झांसा व जुमला लगने लगता है। निवेश को ट्रैक करनेवाली फर्म प्रोजेक्ट्स टुडे के ताज़ा डेटा के मुताबिक मार्च में खत्म हुए वित्त वर्ष 2023-24 में भारत में निजी क्षेत्र का निवेश 15.3% घटा है। निजी क्षेत्र की निवेश योजनाओं में सबसेऔरऔर भी

झांकियां गणतंत्र दिवस के परेड में शोभा देती हैं, देश के आर्थिक विकास में नहीं। लेकिन मोदी सरकार ने पिछले दस साल में आर्थिक विकास के मामले में केवल झांकियों से काम चलाया है। दिक्कत यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनाव प्रचार में भी झांकियां दिखाने से बाज़ नहीं आ रहे। उन्होंने शनिवार को एक जनसभा में कहा कि भारत में रिकॉर्ड निवेश आ रहा है। इसमें देशी और विदेशी निवेश दोनों शामिल है। प्रधानमंत्री मोदीऔरऔर भी

इन दिनों फेसबुक और एक्स (पहले के ट्विटर) जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर शेयर बाज़ार में निवेश व ट्रेडिंग का गुर सिखाने वाले गुरुओं की बाढ़ आई हुई है। इनमें पुरुष व महिला, दोनों एक्सपर्ट शामिल हैं। यहां तक कि ज़ी बिजनेस जैसे चैनलों के एंकर भी शामिल हैं जिनके साथ मिलकर धांधली करनेवाले 15 उस्तादों पर सेबी ने ढाई महीने पहले 7.41 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया था। आम निवेशकों को झांसा देने के लिए पहलेऔरऔर भी