अनिश्चितता से भरी दुनिया है तो धंधे में भी ऊपर-नीचे चलता रहता है। कभी तेज़ तो कभी मंदा। कंपनियों के शेयर सीधे-सीधे उसके धंधे से प्रभावित होते हैं तो अगर उसमें ऑपरेटर सक्रिय न हों तो धंधे के मंदा पड़ते ही शेयर भी ठंडे पड़ने लगते हैं। ऐसे में लम्बे समय के निवेशक को क्या करना चाहिए? नियम व समझदारी कहती है कि अगर किसी भी वजह से कोई शेयर हमारे खरीद मूल्य से 25% तक गिरऔरऔर भी