बंद है मुठ्ठी तो लाख की, खुल गई तो फिर खाक की। उंगली पर जब तक काली स्याही का निशान न लगे, तब तक सरकार में बैठी और उससे बाहर की पार्टियां उसकी कीमत लगा रही हैं। एक बार निशान लग गया, फिर पांच साल तक कौन पूछनेवाला! अभी गिनने को है कि 90 करोड़ मतदाता, जिसमें से 50 करोड़ युवा मतदाता और उसमें से भी 15 करोड़ ऐसे जिन्होंने पिछले पांच सालों में मतदाता बनने काऔरऔर भी

भारत में उद्यमशीलता की कोई कमी नहीं। हमारे नगरों-महानगरों की छोटी-छोटी गलियों में आपको इसकी झलक मिल जाती है। न जाने कितने चरणों में अपना माल बनवाकर छोटी कंपनियां बडे ग्राहकों तक पहुंचाती हैं। यही छोटी कंपनियां एक दिन बड़ी बन जाती हैं तो उनके मूल्य का कोई ठिकाना नहीं रहता। हम आज तथास्तु में ऐसी ही एक छोटी से बड़ी बनी कंपनी लेकर आए हैं जिसने आठ साल में आठ गुना से ज्यादा रिटर्न दिया है…औरऔर भी