ट्रेडिंग के मकसद का मुख्य फ्रेम, उसके भीतर लक्ष्य, फिर सफलता का विज़न व बुद्धि के इस्तेमाल पर ज़ोर। आत्म अनुशासन के इन चार कदमों के बाद पांचवां कदम है अपने ट्रेडिंग सिस्टम के लिए सारा हार्डवेयर चौकस बनाने में जुट जाना। कहां बैठेंगे, सुबह या शाम कितना समय लगाना है, लैपटॉप कौन-सा होगा, नेट कनेक्शन किसका लेना है, किस ब्रोकर की सेवा लेनी है? इन सारे मसलों को कायदे से सुलझा लें। अब सोम का व्योम…औरऔर भी

पानी ऊपर से नीचे बहता है। लेकिन बचत हमेशा कम से ज्यादा रिटर्न की तरफ बहती है। इधर ब्याज दर घटने पर लोगबाग एफडी से धन निकालकर म्यूचुअल फंडों की इक्विटी स्कीमों में लगाने लगे हैं। शेयरों की ज्वाला पर भी पतंगे टूटे पड़े हैं। इससे म्यूचुअल फंडों और ब्रोकरों की कमाई बढ़ गई है। लेकिन निवेशकों की कमाई अंततः बढ़ पाएगी या 2008 जैसा हश्र होगा? यह अहम सवाल है। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

अपनी कमियों और बाज़ार के सच को समझने की दृष्टि हासिल करने के बाद परखें कि यहां कौन सफल होते हैं और कितने लाख कोशिशों के बावजूद पिटते रहते हैं। दोनों से सीखें। लेकिन किसी रोल मॉडल या अकाट्य मंत्र के चक्कर में न पड़ें। हां, बाज़ार के दिग्गजों को ज़रूर पढ़ना चाहिए। मोटे तौर पर समझ लें कि भावनाओं व आवेग को किनारे रख बुद्धि का जितना इस्तेमाल करेंगे, उतना सफल होंगे। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

मकसद और लक्ष्य के बाद तीसरा कदम यह है कि आप सफलता का गहरा विज़न विकसित करें। बाज़ार में सफल होने के लिए कौन-कौन सी बातें ज़रूरी हैं। पूंजी के अलावा इसमें सबसे बड़े संसाधन खुद आप हैं। इसलिए बारीकी से समीक्षा करें कि आपकी कौन-सी कमज़ोरी सफलता हासिल करने में बाधा बन सकती है। उस पर ध्यान केंद्रित करें। अधिकतम कोशिश यह रहे कि हम बाजार के सच को साफ-साफ देख सकें। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

ट्रेडिंग का मकसद स्पष्ट करने के बाद उसके मद्देनज़र तय करें कि आपका लक्ष्य क्या है। यह लक्ष्य हवा-हवाई नहीं,  बल्कि आपकी अपनी सामर्थ्य व संसाधनों के भीतर होना चाहिए। वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग एक तरह का बिजनेस है और हर बिजनेस के लिए मेहनत के अलावा दूसरी सबसे ज्यादा ज़रूरी चीज़ होती है पूंजी। शेयरों की ट्रेडिंग में इस बाज़ार के लिए रखे कुल धन का 5% से ज्यादा नहीं लगाना चाहिए। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी