ज़िंदगी कोई आलू का पराठा नहीं कि किसी ने बनाया और आप खा गए। अर्थव्यवस्था भी इतनी पालतू नहीं कि सरकार ने कहा और वो उछलने लग जाए। बराबर ऐसा कुछ आता रहता है कि पुराना मिटकर नए में समा जाता है। नया पुराने को समेट कर आगे बढ़ता रहता है। इसलिए निवेश और उससे जुड़ी सोच में भी बराबर नयापन लाते रहना चाहिए। नए संवत 2074 का यही संदेश है। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

संवत 2073 बीत गया। नया संवत 2074 शुरू हो रहा है। सभी शुभलाभ के लिए शुभ शुरुआत की कामना रखते हैं। यह बहुत अच्छी बात है और सहज मानव स्वभाव का हिस्सा है। लेकिन वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग में जहां हर दिन नहीं, हर पल हालात व भाव बदलते हों, वहां क्या कोई शुभ शुरुआत अपने-आप में पर्याप्त हो सकती है? यहां तो बराबर ‘सावधानी हटी, दुर्घटना घटी’ वाली स्थिति रहती है। इसी फ्रेम में हमें मुहूर्तऔरऔर भी

ट्रेडिंग में सफलता के लिए ज़रूरी आत्म अनुशासन का 7वां व आखिरी कदम है अभ्यास। कोई भी हुनर किताबों से नहीं, बल्कि अभ्यास से सीखा जाता है। द्रोणाचार्य नहीं मिले, लेकिन एकलव्य अभ्यास के दम पर अर्जुन से भी बड़ा धनुर्धर बन गया। हर किसी को अपना खाना खुद पचाना होता है, उसी तरह ज्ञान को व्यवहार में खुद उतारना पड़ता है। शुरुआत में थोड़ी पूंजी, थोड़ा रिस्क। ट्रेडिंग पूंजी को बचाकर चलें। अब बुध की बुद्धि…औरऔर भी

ट्रेडिंग में सॉफ्टवेयर कौन-सा इस्तेमाल करना है? आपका ब्रोकर चार्टिंग का जो सॉफ्टवेयर देता है, क्या वह पर्याप्त है या आपका काम बीएसई व एनएसई की साइट पर मिल रहे मुफ्त चार्ट से चल जाता है? टेक्निकल एनालिसिस के कौन-से इंडीकेटर इस्तेमाल करने हैं? एंट्री, एक्जिट व स्टॉप लॉस का क्या सिस्टम अपनाना है? पक्का कर लें कि आपने सिस्टम में संस्थाओं की मांग व सप्लाई के संकेत ज़रूर शामिल किए गए हों। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी