इधर पिछले कुछ महीनों से शेयर बाज़ार में सक्रिय निवेशकों व ट्रेडरों की संख्या बढ़ती जा रही है। दरअसल जब भी बाज़ार बढ़ता है, शेयरों के भाव नई ऊंचाई बनाते हैं, तब ज्यादातर लोगों को शेयर खरीदने में बड़ी सुरक्षा महसूस होती है। वहीं, भावों के गिरने पर वे किसी भी कीमत पर बेचकर निकल लेने की फिराक में रहते हैं। यह मानसिकता दीर्घकालिक निवेश व अल्पकालिक ट्रेडिंग, दोनों के लिए घातक है। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी