टमाटर वही, रुपया वही। लेकिन पहले सौ रुपए में दस किलो मिलता था, अब एक किलो। उपयोगिता वही, मूल्य वही। लेकिन भाव चढ़ गया है। मामला सीजनल है। अगले सीजन तक फिर उतर जाएगा। शेयर बाज़ार में बहुत से शेयरों का भी यही हाल है। ऐसे में हमें बहुत सावधानी से वही कंपनियां चुननी चाहिए जिनका मूल्य सीजनल न हो, बराबर चढ़ता रहे और भाव उसी हिसाब से बढ़ता रहे। तथास्तु में आज ऐसी ही एक कंपनी…औरऔर भी

आगे-पीछे का सारा ध्यान रख अगर हम योजना बनाकर चलेंगे और बाज़ार के रिस्क को समझते हुए स्टॉप लॉस या पोजिशन साइज़िंग के अनुशासन का पालन करेंगे तभी शेयर बाज़ार से नियमित मुनाफा कमा सकते हैं। वहीं, अंधेरे में तीर चलाएंगे तो दो-चार तुक्कों के बाद हमारा लहूलुहान होना तय है। अब तो भावनाएं जोर न मार सके, इसकी व्यवस्था ऑर्डर देते समय ही स्टॉप लॉस व लक्ष्य बांधकर की जा सकती है। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी

चार्ट पर लगातार हरी-हरी कैंडल बनती जाती है तो हर किसी को लगता है कि खरीदते जाओ क्योंकि शेयर का बढ़ना तो पक्का है। लेकिन हम भूल जाते हैं कि बाज़ार में हर कोई मुनाफा कमाने आया है और शेयर के चढ़ने के बाद बेचेगा नहीं तो सचमुच का मुनाफा कहां से कमाएगा। इसलिए हमें साप्ताहिक या महीने के चार्ट से देखना पड़ता है कि ठीक पिछली बार कहां पर मुनाफावसूली चली थी। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

चार्ट की भाषा फॉर्मूलों में बांधकर नहीं समझी जा सकती। इसीलिए टेक्निकल एनालिसिस के पच्चीसों इंडीकेटर लेकर भी 95% ट्रेडर बाज़ार में पिटते-पिटाते रहते हैं। हमें रूढ़िगत धारणाओं से निकलना होगा। जैसे, माना जाता है कि हरी कैंडल तेज़ी और लाल कैंडल गिरावट का संकेत देती है। लेकिन रंग से ज्यादा कैंडल का आकार और स्थान मायने रखता है। उससे भी ज्यादा अहम है कि ये कैंडल किस ज़ोन में बने हैं। अब लगाएं बुध की बुद्धि…औरऔर भी

कोई खबर नहीं, कोई सूत्र नहीं, कोई सनसनी या टिप्स नहीं। रिटेल ट्रेडरों को अगर शेयर या किसी वित्तीय बाज़ार से कमाना है तो उनके पास एकमात्र साधन है उनके भावों का चार्ट और उसे पढ़ने की कला। इसमें टेक्निकल एनालिसिस केवल वर्णमाला है। अक्षरों को पहचानने के बाद शब्द और वाक्य हमें ही बनाने पड़ते हैं। मूल बात है चार्ट पर बाज़ार की सबल भावना को पढ़ना और उससे खेलना। अब पकड़ते हैं मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी