पूंजी की लागत घटने से देश में औद्योगिक निवेश बढ़ता है। आम लोगों के साथ ही कंपनियों के लिए ऋण लेना थोड़ा सस्ता पड़ता है। इससे अर्थव्यवस्था को गति मिलती है। इस गति से शेयर बाज़ार को आवेग मिलता है। यही आशावाद अब बढ़ता नज़र आ रहा है। तमाम अर्थशास्त्री और विशेषज्ञ मानते हैं कि आगे शहरों से लेकर गांवों तक मांग बढ़ सकती है क्योंकि इस बार अच्छे मानसून का अनुमान है। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी