20% हम, बाकी 80% प्रताप आपका
हम हिंदुस्तानी बड़े ही नहीं हो रहे। सोचते हैं कि कोई दूसरा हमारा कल्याण कर देगा। इस सोच में बंधे ट्रेडर व निवेशक शेयर बाज़ार तक में बस टिप्स खोजते हैं। इससे उन्हें तो कोई फायदा नहीं मिलता। हां, राजनेता, मंदिर, मुल्ला और टिप्सबाज़ ज़रूर ऐश करते हैं। लोगबाग यह समझने को तैयार नहीं कि उन्हें अपना भला खुद करना होगा। हमारी मदद बस 20% काम आएगी। बाकी 80% रंग लाएगी आपकी सतर्कता। अब शुक्र का चक्र…औरऔर भी
गलत होगा तंत्र के इशारे पर नाचना
खबरों का एक अंतरराष्ट्रीय तंत्र है जो दुनिया भर के इक्विटी व बांड बाज़ारों में लहर उठाने के लिए कंकड़ फेंका करता है। अन्यथा 10-12 घंटे में ही फेडरल रिजर्व का मन कैसे बदल जाएगा? मंगलवार को कंकड़ फेंका कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक दो दिवसीय बैंठक में ब्याज दरें बढ़ानेवाला है। लेकिन बुधवार आते-आते बोल दिया कि उसका मन बदल गया है। इस तंत्र के इशारे पर नाचने के बजाय समझें बाज़ार संतुलन। अब गुरुवार का गुर…औरऔर भी
वहां ब्याज दर बढ़ी तो भागेंगे विदेशी!
भारतीय शेयर बाज़ार में पिछले डेढ़ महीने में किसी एक दिन में ऐसी तल्ख गिरावट नहीं आई थी। सेंसेक्स कल 1.21% और निफ्टी 1.36% गिर गया। डर है कि मंगल को देर रात से शुरू हुई दो दिनी बैठक में अमेरिकी फेडरल रिजर्व कहीं समय से पहले ब्याज दर बढ़ाने का फैसला न कर ले। इस आशंका में विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने मुनाफावसूली शुरू कर दी है। क्या हैं, इस बिकवाली के मायने? समझते हैं आगे…औरऔर भी
ब्रोकर की कमाई काहे कराते हो भाई!
बहुतेरे लोगों को इंट्रा-डे ट्रेडिंग में अच्छा-खासा आनंद आता है। सबसे बड़ा फायदा कि दिन का रिस्क दिन में निपट जाता है। चिंता नहीं रहती कि कल क्या होगा। इनमें से कुछ लोग तो घंटे-घंटे भर में सौदे काटते हैं और थोड़ा-थोड़ा करके ज्यादा मुनाफा कमा लेते हैं। लेकिन ब्रोकरेज और खरीदने-बेचने के मूल्य के अंतर की लागत को गिनें तो वे अक्सर घाटे में रहते हैं, जबकि ब्रोकर की होती भरपूर मौज। अब मंगलवार की दशा-दिशा…औरऔर भी
काया छोड़ फंसे हैं छाया की माया में
रिस्क भले ही ज्यादा हो, लेकिन कम दिखे तो लोग उधर ही भागते हैं। अपने यहां शेयर बाज़ार में यही हो रहा है। लोगबाग डेरिवेटिव ट्रेडिंग की तरफ टूटे पड़े हैं। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि डेरिवेटिव ट्रेडिंग वोल्यूम में देशी-विदेशी संस्थाओं का हिस्सा मात्र 17% है और बाकी 83% सौदे रिटेल व प्रॉपराइटरी ट्रेडर करते हैं जबकि लिस्टेड कंपनियों में इनका निवेश मात्र 18% है। काया को छोड़ पकड़ी छाया की माया! अब आगाज़ हफ्ते का…औरऔर भी





