अर्थ और वित्त की दुनिया बड़ी निर्मम है। यहां भावना और भावुकता से ऊपर उठकर सीधा-सीधा हिसाब चलता है। जापान में त्राहि-त्राहि मची है। लेकिन चूंकि जापान दुनिया में कच्चे तेल का तीसरा सबसे बड़ा ग्राहक है और वहां तमाम रिफानरियां आग की चपेट में आ गई हैं तो वे बंद रहेंगी जिससे तेल की मांग तात्कालिक रूप से घट जाएगी। सो, कच्चे तेल के दाम खटाक से 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गए। लेकिनऔरऔर भी

प्रकृति ने हर इंसान को मौलिक बनाया है। एक ही मां-बाप की संतानों में जीन्स का भिन्न समुच्चय। फिर भी अनुकृतियों से भरा समाज! दोष किसका? थोड़ा हमारा तो बहुत सारा जीने की शर्तों का।और भीऔर भी