एलआईसी के अलावा दूसरी बीमा कंपनियों से ग्राहकों ने मुंह मोड़ा

होना यह चाहिए था कि निजी क्षेत्र की जीवन बीमा कंपनियां ऐसी होड़ देती हैं कि ग्राहक सरकारी कंपनी एलआईसी को छोड़कर उनकी तरफ दौड़े चले आते। लेकिन साल 2000 में जीवन बीमा कारोबार को खोलने के बाद बराबर हो रहा है इसका उल्टा। बीमा नियामक संस्था, आईआरडीए (इरडा) के ताजा आंकडों के मुताबिक फरवरी 2012 तक एलआईसी की कुल गैर-एकल प्रीमियम वाली व्यक्तिगत पॉलिसियों की संख्या 2,65,37,802 हो गई है। यह संख्या फरवरी 2011 तक 2,53,60,881 थी। इस तरह साल भर एलआईसी की इन पॉलिसियों की संख्या 4.64 फीसदी बढ़ गई है। इस दौरान इन पॉलिसियों में जमा प्रीमियम 19,265.71 करोड़ रुपए से 19.68 फीसदी बढ़कर 23,057.32 करोड़ रुपए पर पहुंच गया।

वहीं दूसरी तरफ, देश में सक्रिय निजी क्षेत्र की 23 जीवन बीमा कंपनियों की गैर-एकल प्रीमियम वाली व्यक्तिगत पॉलिसियों की सम्मिलित संख्या इस दौरान 89,66,741 से 26.61 फीसदी घटकर 65,80,265 पर आ गई है। इन पॉलिसियों में आया प्रीमियम भी 28.56 फीसदी घटकर 19,345.37 करोड़ रुपए से 13,820.04 करोड़ रुपए पर आ गया है। ये आंकड़े एलआईसी के आगे कितनी दयनीय लगते हैं! पूरा निजी क्षेत्र मिलाकर अकेली एलआआईसी की कमर तक भी नहीं पहुंचता।

निजी क्षेत्र की मार खानेवाली जीवन बीमा कंपनियों में बजाज एलियांज, एचडीएफसी स्टैंडर्ड, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल और रिलांयस लाइफ जैसे दिग्गज नाम शामिल हैं। इस दौरान आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल की गैर-एकल प्रीमियम वाली व्यक्तिगत पॉलिसियों की संख्या 11,16,551 से 16.57 फीसदी घटकर 9,31,512 पर आ गई, जबकि इनमें जमा प्रीमियम 3223.14 करोड़ रुपए से 25.96 फीसदी घटकर 2386.50 करोड़ पर आ गया।

एचडीएफसी स्टैंडर्ड पर थोड़ा कम फर्क पड़ा है। उसकी व्यक्तिगत गैर-एकल प्रीमियम वाली पॉलिसियों की संख्या 5,36,930 से घटकर 5,26,136 और इनमें जमा प्रीमियम 2489.25 करोड़ रुपए से घटकर 2189.61 करोड़ पर आ गया। लेकिन अनिल अंबानी समूह की कंपनी रिलायंस लाइफ को कुछ ज्यादा ही तगड़ा झटका लगा है। फरवरी 2011 तक उसकी गैर-एकल प्रीमियम वाली व्यक्तिगत पॉलिसियों की संख्या 16,34,072 थी। लेकिन फरवरी 2012 तक यह 44.71 फीसदी घटकर 9,03,554 पर आ गई। इसी दौरान इनमें जमा प्रीमियम 1758.32 करोड़ रुपए से 47.68 फीसदी घटकर 920.03 करोड़ रुपए पर आ गया।

बराबर विज्ञापनों के जरिए लोगों के सामने बनी रहनेवाली बजाज एलियांज का हाल भी सुखद नहीं है। साल भर में उसकी इस श्रेणी की पॉलिसियों की संख्या 12,54,577 से 37.32 फीसदी घटकर 7,86,328 पर आ गई है, जबकि इनमें जमा प्रीमियम 1566.96 करोड़ रुपए से 39.78 फीसदी घटकर 943.63 करोड़ रुपए पर आ गया है। जानकारों के मुताबिक इसकी दो वजहें हैं। एक तो यह कि यूलिप पर जोर देकर और उन्हें गलत सही ग्राहकों के मत्थे मढ़कर निजी जीवन बीमा कंपनियों ने ग्राहकों का जो विश्वास तोड़ा है, उसे वापस लाना बहुत मुश्किल है। और दो, यह कि निजी जीवन बीमा कंपनियों के लिए एलआईसी जैसा वितरण तंत्र बना पाना भी बहुत मुश्किल है।

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