ज़िंदगी को संवारने में बड़ी जद्दोजहद करनी पड़ती है। इस बीच थकने-हारने पर रोना आए तो रो लेना चाहिए जी भर। आखिर रोने में क्या बुराई! रोने से मन हल्का होता है और हल्का मन उड़ने लगता है, हल्के-हल्के।
2010-08-14
ज़िंदगी को संवारने में बड़ी जद्दोजहद करनी पड़ती है। इस बीच थकने-हारने पर रोना आए तो रो लेना चाहिए जी भर। आखिर रोने में क्या बुराई! रोने से मन हल्का होता है और हल्का मन उड़ने लगता है, हल्के-हल्के।
© 2010-2025 Arthkaam ... {Disclaimer} ... क्योंकि जानकारी ही पैसा है! ... Spreading Financial Freedom
रोने का मन करे तो रो लेना चाहिये।
पहली बार आया अर्थकाम पर और बहुत आनंद आया. हिन्दी में ऐसे सुव्यवस्थित प्रयासों की सख़्त दरकार है.साधुवाद.