युद्ध से मध्य-पूर्व ही नहीं, पूरी दुनिया में अफरातफरी मची है। कच्चे तेल का दाम प्रति बैरल 110 डॉलर को पार कर रहा है। भारत अपनी ज़रूरत का 88% कच्चा तेल आयात करता है। डॉलर 94 रुपए तक पहुंच गया है तो हमारा आयात बिल बढ़ता जा रहा है। ऊपर से खाड़ी के देशों में रह रहे करीब 90 लाख भारतीयों द्वारा देश में हर साल भेजे जा रहे 51 अरब डॉलर से ज्यादा की विदेशी मुद्रा नहीं आ पाएगी। इससे देश में चालू खाते का संकट पैदा हो सकता है। दुनिया भी मंदी के मुहाने पर है। शायद इसी डर से मुद्रास्फीति बढ़ने की हकीकत के बावजूद अमेरिका और यूरोप के केंद्रीय बैंक ब्याज दर बढ़ाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे। यह सब आज की कड़वी हकीकत है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि निवेश की दुनिया मिटने जा रही है और शेयर बाज़ार अब कभी उबर नहीं पाएगा। बाज़ार 11 सितंबर 2001 का हमला, 2008 का वैश्विक वित्तीय संकट, 2020 की कोरोना महामारी, रूस-यूक्रेन युद्ध व अमेरिका के जवाबी टैरिफ जैसे संकटों से निपट चुका है तो अमेरिका-इज़राइल और ईरान से युद्ध भी गुजर जाएगा। बाज़ार में डर व लालच का शाश्वत चक्र चलता है। डर व संकट में मूल्यवान स्टॉक्स सस्ते हो जाते हैं। तथास्तु में आज ऐसा ही एक स्टॉक…
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