हमारे शेयर बाज़ार के बढ़ने और कंपनियों के शेयर के चढ़ने का मूलाधार है भारत की विकासगाथा। इस विकासगाथा के दो मूल आधार हैं। एक, हमारी बड़ी आबादी और बड़ा मध्य-वर्ग जो देश में उपभोग का बड़ा बाज़ार बनाता है। हमारा खाता-पीता मध्यवर्ग इतना बड़ा है कि उसमें पूरा यूरोप समा जाए। दूसरा मूल आधार है आबादी का 65% हिस्सा जिसकी उम्र 35 साल से कम है, जिसे हमारा डेमोग्राफिक डिविडेंड भी कहा जाता है। उपभोग का विशाल बाज़ार और विशाल युवा आबादी के ये दोनों ही मूल आधार 10-11 साल के हो-हल्ले के बावजूद डांवाडोल हैं। न युवाओं को कायदे का रोज़गार मिल रहा है और न ही लोगों के पास उपभोग को टिकाने या बढ़ाने के पर्याप्त संसाधन हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पूछती हैं कि देश में आखिर निवेश क्यों नहीं बढ़ रहा? निजी क्षेत्र पूंजी निवेश क्यों नहीं कर रहा? उन्हें दिखता क्यों नहीं कि देश में मांग ठंडी पड़ी है, लोगबाग उपभोग में कटौती कर रहे हैं तो निजी क्षेत्र क्यों पूंजी निवेश करे। निजी क्षेत्र अपना सरप्लस या तो कैश के रूप में बचाकर रख रहा है या मौका मिल रहा है तो देश के बाहर निवेश कर रहा है। यही वजह है कि निफ्टी और सेंसेक्स साल भर से जहां के तहां अटके हैं। अब तथास्तु में आज की कंपनी…
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