डोनाल्ड ट्रम्प ने मागा (मेक अमेरिका ग्रेट अगेन) का नाम लेकर टैरिफ-टैरिफ की चिल्ल-पों और अपने दूसरे कर्मों से अमेरिका को बर्बादी की ढलान पर डाल दिया है। वहीं, चीन अपनी मैन्यूफैक्चरिंग के दम पर विश्व विजय के अभियान पर निकल पड़ा है। उसने कनाडा से आयात होनेवाले कैनेला के बीजों पर टैरिफ 84% से घटाकर 15% करने के बदले वहां निर्यात की जानेवाली इलेक्ट्रिक कारों पर टैरिफ 100% से घटवा कर मात्र 6.1% करा लिया। चीन ट्रम्प जैसे सनकी को भी टैरिफ के मामले में झुकाने पर कामयाब रहा। लेकिन मोदी सरकार रिरियाती रही तो मनबढ़ ट्रम्प भारतीय आयात पर टैरिफ बढ़ाता चला गया। आज के हालात में केवल भारत के पास चीन के विजयरथ को रोकने की सामर्थ्य है। मगर, हमारे नरेंदर राष्ट्रीय हितों की बलि देकर चीन के आगे सरेंडर करते जा रहे हैं। गलवान घाटी में चीन द्वारा हमारे 4000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर कब्ज़ा कर लेने पर मोदी ने कहा था कि न कोई घुसा है, न कहीं कोई कब्ज़ा हुआ है। दस दिन पहले वित्त मंत्रालय ने सरकारी ठेको में चीन की कंपनियों के भाग लेने पर लगा बैन उठा लिया। हफ्ते भर पहले सरकार के सर्वोच्च स्तर पर फैसला हो गया कि भारतीय अर्थव्यवस्था को चीन के लिए धीरे-धीरे और ज्यादा खोल दिया जाएगा। आखिर चीन के आगे भारत ऐसा दंडवत और लम्बलेट क्यों हो रहा है? अब सोमवार का व्योम…
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