वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग में सबसे बड़ी आस्ति हैं आप और आपका माइंटसेट। टेक्निकल एनालिसिस, ट्रेडिंग की सलाह, सूचनाओं व ज्ञान का नंबर बाद में आता है। आप इसलिए क्योंकि स्टॉप लॉस या किसी अन्य वजह से हिल गए हैं तो आप सही व संतुलित फैसला ले ही नहीं पाएंगे। माइंडसेट इसलिए क्योंकि आपको भीड़ से उल्टा सोचने की आदत डालनी है। औरों से पहले खरीदें और औरों से पहले बेचें। अब आजमाते हैं बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

बाज़ार में सभी पैसा बनाने के लिए आते हैं। मगर कड़वी हकीकत यह है कि यहां 95% लोग पैसा गंवाते हैं और केवल 5% कमाते हैं। इसका कारण सूचनाओं या पूंजी का अभाव नहीं। दरअसल, ट्रेडिंग में भावों की सूचना सबसे अहम है जो छोटे-बड़े सभी को उपलब्ध है। हरेक सौदे में जीतना संभव नहीं। लेकिन हम ‘गंवाएं तो पैसा, कमाएं तो रुपया’ का अनुशासन अपनाएं तो बराबर फायदे में रहेंगे। अब पकड़ते हैं मंगलवार की आहट…औरऔर भी

सरकार ने चाहा। मगर, बहाना है कि ब्रोकरों के संगठन, एसोसिएशन ऑफ नेशनल स्टॉक एक्सचेंजेज़ मेम्बर्स ऑफ इंडिया ने मांग की थी कि बजट के दिन शनिवार को बाज़ार खोला जाए ताकि उसी दिन मूल्यों की खोज़ सही हो जाए। असली बात यह है कि सरकार बजट पर फौरन बाज़ार की तालियां चाहती है। सेबी ने सरकार का इशारा समझते हुए बजट के दिन बाज़ार खोलने का फरमान जारी कर दिया। अब करते हैं हफ्ते का आगाज़…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में भरोसे का भयंकर अकाल है। तमाम ब्रोकरेज़ हाउस व एनालिस्ट घनेरों सलाह देते हैं। लेकिन, वे जो कहते हैं, खुद उसका उल्टा करते हैं। उनका मकसद किसी तरह निवेशकों का शिकार करना होता है। निवेशकों की हालत यह है कि दूध का जला, छाछ भी फूंककर पीता है। ऐसे में निष्पक्ष व ईमानदार सलाह का पता लगते ही लोग उसके दीवाने हो सकते हैं। मगर, उन्हें पता तो लगे! तथास्तु में नई संभावनामय कंपनी…औरऔर भी

वित्तीय बाज़ार आज की वस्तुस्थिति पर नहीं, कल की संभावित स्थिति पर चलता है। इसलिए यहां डर और लालच, दो ही भावनाएं काम करती हैं। लंबे निवेश का फंडा अलग है। पर, छोटे समय में ट्रेडिंग से वही कमाता है जो अपनी डर या लालच की भावना पर काबू रखते हुए दूसरों की डर या लालच की भावना का इस्तेमाल करता है। कहना आसान, करना बेहद मुश्किल। मगर, सफल ट्रेडिंग का यही राज़। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

अल्गोरिदम या हाई फ्रीक्वेंसी ट्रेड (एचएफटी) का नाम सुनकर हम खुद को बड़ा पस्त महसूस करते हैं। ऐसे ट्रेड अमूमन इंट्रा-डे होते हैं और इसमें चंद पैसों की चाल पर लाखों कमाए जाते हैं। सारा काम कंप्यूटर में पहले से दर्ज सॉफ्टवेयर करता है। पलक समझते ही सौदा पूरा। स्पीड और पूंजी में हम उनकी बराबरी नहीं कर सकते। लेकिन अपने नियमबद्ध या अल्गोरिदम स्विंग ट्रेड में हम उन्हें मात कर सकते हैं। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

प्रकृति ही नहीं, बाज़ार में भी कमज़ोर चीज़ नहीं चलती। बिना तैयारी के यहां जो कोई आता है, जानकार लोगों का शिकार बन जाता है। यहां कोई इंट्यूशन या घमंड नहीं चलता क्योंकि जब चीजें पल-पल बदल रही हों तब घमंड आपको एक जगह चिपका देता है। और, ज़िंदगी की ट्रेड-मिल पर आपका पैर कहीं चिपका तो समझो कि आप गए। नई गति को पकड़ने का माद्दा हो, तभी ट्रेडिंग करनी चाहिए। अब आजमाएं बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

शेयरों के भाव कभी-भी सीधी रेखा में नहीं चलते। मिनट-घंटे, दिन-हफ्ते, महीना-साल, हर छोटे-बड़े टाइमफ्रेम में बराबर ऊपर-नीचे होते रहते हैं। ट्रेन्ड बदलता है। कुशल ट्रेडर की कला यह है कि वह स्टॉक में ठीक तब एंट्री मारे, जब कोई ट्रेन्ड शुरू हो रहा हो और जैसे ही ट्रेन्ड बदलनेवाला हो, उससे थोड़ा पहले निकल ले। ट्रेन्ड की यही समझ सफलता की कुंजी है। कहने में आसान, लेकिन करने में कठिन। अब देखते हैं सोमवार का व्योम…औरऔर भी

महीने भर पहले हमने एक कंपनी में 225-234 की रेंज में निवेश को कहा था, लक्ष्य तीन साल में 450 तक पहुंचने का है। इस दौरान इसका शेयर 206 तक गिर गया तो कुछ सब्सक्राइबर चिंतित हो उठे। वैसे, 6 फरवरी को बेहतर नतीजों के बाद यह उठने लगा है। दरअसल, भारतीय अर्थव्यवस्था और अच्छी कंपनियों में इतनी संभावना है कि हमें महीने या तिमाही की गिरावट से परेशान नहीं होना चाहिए। तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

पोजिशन साइज़िंग कर ली। हर सौदे में बराबर पूंजी लगाई। फिर भी बाज़ार का रिस्क आपको डुबा सकता है। बचने के लिए आपने हर सौदे में 2% स्टॉप-लॉस भी लगा डाला। लेकिन बाज़ार में तेज़ उतार-चढ़ाव है तो इतना स्टॉप-लॉस तो खटाक से ट्रिगर हो जाएगा! इससे बचने का उपाय यह है कि किसी एक सौदे में स्टॉप-लॉस की मात्रा आपकी कुल ट्रेडिंग पूंजी के 0.5% से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। अब करते हैं शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी