अच्छी कंपनियां चुनो तो वे कभी-कभी ज्यादा ही अच्छी निकल आती हैं। आज तथास्तु में हम जिसका जिक्र करने जा रहे हैं, वो ऐसी ही कंपनी है। हमारी गणना थी कि उसका शेयर चार साल में 52% बढ़ेगा। लेकिन वो सवा साल में ही 158% बढ़ गया। कंपनी की मौजूदा बिजनेस रणनीति व संभावनाओं के आधार पर लगता है कि उसका शेयर अगले चार साल में 105% और बढ़ सकता है। सब्सक्राइबरों के लिए खोलते हैं रहस्य…औरऔर भी

बाहर से किसी को तैरते देखो तो कितना आसान लगता है! बस, दोनों हाथ-पैर एक लय में चलाते रहो, तैरते जाओगे। लेकिन दिखने में इतनी आसान-सी चीज़ सीखने में कतई आसान नहीं। महीनों की मशक्कत के बाद कोई कायदे से तैर पाता है। ट्रेडिंग की कला भी कुछ इसी तरह सीखनी पड़ती है। दिक्कत यह है कि अधिकांश लोग बिना सीखे ही बड़े-बड़े दांव लगाने लगते हैं और डूब जाते हैं। आइए, अब करें शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

गणनाएं बाज़ार से निकलती हैं। पर बाज़ार गणनाओं से नहीं चलता। अक्सर वो हमारे तमाम अनुमानों को धता बताते हुए अलग ही दिशा पकड़ लेता है। बाद में सभी उसकी वजह गिनाने लगते हैं। लेकिन किसी एक वजह का सिरा नहीं मिल पाता। इसलिए ट्रेडिंग करते वक्त हमें हमेशा कुछ न कुछ अनजाना घट जाने के लिए तैयार रहना चाहिए। ऐसे में ही स्टॉप लॉस और पोजिशन साइज़िंग हमें बचाती हैं। अब पकड़ते हैं गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

आम ट्रेडरों में अंधा रिस्क लेने का जुनून बढ़ता जा रहा है। एनएसई के आंकड़ों के अनुसार मार्च 2015 की तिमाही में एफ एंड ओ या डेरिवेटिव सेगमेंट में हुए कारोबार में रिटेल ट्रेडरों का हिस्सा लगभग दोगुना हो गया है। साल भर में इनका दैनिक कारोबार 55,483 करोड़ से बढ़कर 1.04 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया। इस सेगमेंट का कुल दैनिक कारोबार 2.25 लाख करोड़ रुपए के आसपास रहता है। अब आजमाएं बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग में घाटे से बचना मुमकिन नहीं। लेकिन घाटे को हम न्यूनतम ज़रूर रख सकते हैं। इसके लिए उबाल खाती भावनाएं नहीं, फौलादी अनुशासन चाहिए। किसी एक सौदे में 1.5-2% से ज्यादा घाटे से बचें क्योंकि यह हमारे मन-धन दोनों को तोड़ता है। वहीं, दस में से छह सौदों में 2-2% घाटा लगा, बाकी चार में 6-6% फायदा हुआ, तब भी हम कुल मिलाकर 12% मुनाफा कमा लेंगे। अब परखते हैं सोमवार का व्योम…औरऔर भी

एफडी में इसलिए निवेश करते हैं क्योंकि वहां मूलधन की सुरक्षा के साथ बराबर ब्याज मिलता है। लेकिन 9% सालाना ब्याज पर धन आठ साल में दोगुना होगा। वहीं अगर अच्छी कंपनी में निवेश करें तो धन तीन साल में दोगुना हो सकता है। जैसे, तीन साल पहले इसी कॉलम में हमने पॉलि मेडिक्योर में निवेश को कहा था, तब उसका शेयर 240 रुपए पर था, अभी 514 रुपए है। आज तथास्तु में एक और संभावनामय कंपनी…औरऔर भी

वित्तीय बाज़ार एक ऐसी जगह है जहां आप बहुत सारी गलतियां करना गवारा नहीं कर सकते क्योंकि गलतियां आपका मनोबल ही नहीं गिरातीं, बल्कि आपकी ट्रेड़िंग पूंजी भी उड़ा ले जाती हैं। मसकद है पूंजी को डूबने से बचाना। सो, यहां अपनी ही नहीं, दूसरों की गलतियां से भी बराबर सीखते रहना ज़रूरी है। दिक्कत यह है कि हम दूसरों की सफलताओं के पीछे तो भागते हैं, उनकी गलतियों से सबक नहीं लेते। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी

हर हाल में जीतने की अदम्य इच्छा सहज इंसानी प्रवृत्ति है। शायद इसीलिए हम ट्रेडिंग में भी अचूक मंत्र तलाशते फिरते हैं। हाल ही में एक सज्जन मिले जो इसके लिए किसी कर्ण पिशाचिनी मंत्र साधना की बात कर रहे थे। दोस्तों! मन में कहीं गहरे बैठा लें कि ट्रेडिंग में कामयाबी का कोई अचूक मंत्र नहीं है। यह विशुद्ध रूप से प्रायिकता का खेल है। इसमें 60-65% कामयाबी अभीष्टतम है। अब तलाशते हैं गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

किसी भी समाज का मनोविज्ञान रातोंरात नहीं बदलता। इसकी कुछ झलक हमें वित्तीय बाज़ार में भावों व वोल्यूम के चार्ट में नज़र आती है। बाकी सारे इंडीकेटरों की गणना इन्हीं दो आंकड़ों को मिलाकर की जाती है। पहले जो हुआ है, आगे भी उसके होने की संभावना ज्यादा होती है। इसी सोच के आधार पर समझदार लोग बाज़ार की भेड़चाल को पकड़ते हैं और कभी कमाते तो कभी चूक जाते हैं। अब आजमाते हैं बुध की बुद्धि…औरऔर भी

निर्मल बाबा को बेनकाब हुए तीन साल हो गए। फिर भी तमाम न्यूज़ चैनल दोपहर में उनका घंटे-घंटे भर का कार्यक्रम चलाते हैं क्योंकि उन्हें विज्ञापन की कमाई से मतलब है, न कि मासूम लोगों को ठगे जाने से। हमारे बिजनेस चैनल इसी अंदाज़ में शेयर बाज़ार के ‘बाबाओं’ को पेश करते हैं। फाइनेंस की दुनिया के इन फ्रॉडों की एंकर-गण ऐसी स्तुति करते हैं, जैसे सामने साक्षात भगवान बैठे हों। अब निकालते हैं मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी