कोविड-19 के प्रकोप के बाद दुनिया के वित्तीय जगत का विचित्र हाल है। तमाम देशों के केंद्रीय बैंकों द्वारा छापे गए नोटों से उपजे सस्ते धन का प्रवाह भारत जैसे देशों के शेयर बाज़ारों में आ रहा है। पिछले नौ महीनों में हमारे बाज़ार में इतना विदेशी धन आया है, जितना पिछले बारह सालों में नहीं आया था। हमारे कैश सेगमेंट में एफआईआई/एफपीआई निवेश कोरोना के मामलों जैसी रफ्तार से बढ़ता ही गया। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

शेयर बाज़ार शिखर से नए शिखर की यात्रा पर निकल चुका है। निफ्टी-50 सूचकांक 23 मार्च को कोरोना-कहर में तलहटी पकड़ने के बाद अब तक 68.34% बढ़ चुका है। ध्यान रहे कि दो ही कारकों से शेयरों के भाव और बाज़ार सूचकांक बढ़ते हैं। एक, धन का प्रवाह और दो, बाजार में लिस्टेड कंपनियों की बिजनेस बढ़ाने की क्षमता। कोरोना काल में दूसरा कारक दम तोड़ चुका है। केवल पहला कारक हावी है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

बाज़ार में बवाल। निफ्टी-50 नए ऐतिहासिक शिखर पर। अभी कितना और चढ़ सकता है? वह 35 के पी/ई तक चला गया तो सेंसेक्स पहले 50 तक के पी/ई तक जा चुका है। निवेशक फिलहाल एक रुपए की कमाई पर 35 रुपए दे रहे हैं तो पहले इसकी खातिर 50 रुपए भी दे चुके हैं। सवाल उठता है कि जब अर्थव्यवस्था में हर तरफ मुर्दनी छाई है, कंपनियां लस्त-पस्त हैं, तब ऐसी मदहोशी क्यों? अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में उफान छाया है। निफ्टी अब तक के ऐतिहासिक शिखर से मात्र 2.25% दूर है। यही नहीं, पिछले महीने 14 अक्टूबर को निफ्टी का पी/ई अनुपात 34.87 के सर्वोच्च स्तर तक चला गया था। मतलब, निवेशक निफ्टी-50 में शामिल कंपनियों की 1 रुपए औसत कमाई के लिए 34.87 रुपए दाम देने को तैयार हैं। निफ्टी के लंबे समय के पी/ई का औसत 20 है। आखिर, औसत से 75% ज्यादा दाम क्यों? अब सोम का व्योम…औरऔर भी

आप शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग से अपना और घर-बार का ठीकठाक गुजारा करना चाहते हैं तो महीने में औसतन एक लाख रुपए कमाने होंगे। इस पर बिजनेस का टैक्स भी लगेगा। महीने में 20 दिन ट्रेडिंग तो ऐसे हर दिन आपको 5000 रुपए कमाने होंगे। लेकिन हर दिन इतना कमा नहीं सकते। कभी घाटा, कभी फायदा। इसलिए दिन में कई बार सौदे काटने और करने पड़ेंगे तो निफ्टी या बैंक निफ्टी नहीं जमेंगे। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

अगर आपका रिस्क-प्रोफाइल कमज़ोर और ट्रेडिंग पूंजी भी कम है तो केवल स्टॉक्स के कैश सेगमेंट में ट्रेड करें। न स्टॉक्स डेरिवेरिव्स में जाएं और न ही निफ्टी या बैंक निफ्टी के फ्यूचर्स व ऑप्शंस को हाथ लगाएं। कारण यह कि फ्यूचर्स में लॉट बड़ा होने के कारण ज्यादा पूंजी लगती है, जबकि ऑप्शंस का चक्कर इतना जटिल है कि बिना समझे उतरेंगे तो वह धीरे-धीरे बतौर प्रीमियम आपकी सारी पूंजी निगल जाएगा। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

अपनी श्रेणी समझने का मतलब कि आपका रिस्क प्रोफाइल क्या है? आप कितनी पूंजी गंवाकर भी पस्त नहीं होंगे और आपके पास ट्रेडिंग के लिए इफरात पूंजी बची रहेगी। रिस्क क्षमता कम है तो आपको कम उछल-कूद या बीटा वाले स्टॉक्स चुनने होंगे। सेंसेक्स व निफ्टी का बीटा एक होता है। किसी स्टॉक का बीटा एक से कम तो उसका रिस्क बाज़ार से कम। एक से ज्यादा तो उसका रिस्क बाज़ार से ज्यादा। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग के किसी निर्णय पर पहुंचने से पहले यह तय करें कि आप किस श्रेणी या टाइप के ट्रेडर हैं। आपका माइंडसेट क्या है, कमाने का नज़रिया क्या है और आपकी विशेषताएं या दक्षताएं क्या हैं? अगर आपको अपनी श्रेणी का भान नहीं है और आप किसी दूसरे के अंदाज़ में ट्रेडिंग करना चाहेंगे तो तय मानिए कि आप नाकाम होने और अपनी ट्रेडिंग पूंजी गंवा देने को अभिशप्त हैं। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

कहां ट्रेडिंग करे, कौन-सा स्टॉक खरीदें या स्टॉक्स को छोड़ इंडेक्स डेरिवेटिव्स में ट्रेड करे? इन बातों पर प्रोफेशनल सलाह आप कहीं से ले सकते हैं। लेकिन इसके लिए आप साल की एक लाख रुपए फीस दें या महीने के 1100 रुपए, इन सलाहों से कमाना आपकी कुशलता और अनुशासन पर निर्भर करता है। बाहरी सलाह महज एक इनपुट है। बाकी सारा काम आपकी सर्तकता, समझ और निर्णय लेने की क्षमता करती है। अब सोम का व्योम…औरऔर भी

ट्रेडिंग के लिए बाज़ार के सामान्य होने का इंतज़ार करना चाहिए। इस बार बाज़ार गिरा तो गहरा आघात लगा सकता है। लेकिन कहां तक गिरने पर बाज़ार को सामान्य या स्थिर माना जाएगा। जानकारों के मुताबिक, निफ्टी गिरते-गिरते जब 11,200 से 11,350 की रेंज में आ जाए, तब माना जाएगा कि वह सामान्य अवस्था में लौट आया। फिलहाल ऐसा होने में देर है। तब तक रिटेल ट्रेडरों को दूर से तमाशा देखना होगा। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी