इधर हमारा शेयर बाज़ार जिस कदर बेतहाशा बढ़ रहा है, उसकी एक वजह रिटेल निवेशकों का पतंगों की तरह उमड़ना भी हो सकता है। इसका संकेत बाजार में बढ़ते वोल्यूम से मिलता है। अमूमन कैश सेगमेंट में 65,000 से 75,000 करोड़ रुपए का वोल्यूम होता था। लेकिन 29 जनवरी को यह 85000 करोड़, बजट के दिन 87,600 करोड़ और 2 फरवरी को तो 1,00,470 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। 4 फरवरी को यह 90,288 करोड़ था, जिसमेंऔरऔर भी

बजट के ठीक पहले से तुलना करें तो पिछले चार दिनों में बीएसई का इंडिया इंफ्रास्ट्रक्चर सूचकांक 12.68% और कैपिटल गुड्स सूचकांक 11.99% बढ़ चुका है। वहीं, इस दौरान खुद बीएसई सेंसेक्स 9.35% बढ़ा है। मतलब साफ है कि फंडामेंटल्स की समझ और संभावना पर चलनेवाले निवेशकों ने बजट में की गई घोषणाओं को गंभीरता से लिया है। वैसे, इस समय इंफ्रास्ट्रक्चर सूचकांक 17.42 के पी/ई पर ट्रेड हो रहा है, जबकि कैपिटल गुड्स सूचकांक 105.85 केऔरऔर भी

शेयर बाज़ार का बम-बम करना अर्थव्यवस्था का मजबूत स्थिति का पर्याय नहीं है। जो कोई शेयर बाज़ार की तेज़ी को अर्थव्यवस्था की मजबूती मानता या बताता है, वो या तो महामूर्ख है या महाधूर्त। अक्सर आर्थिक नीतियों में फिसड्डी साबित हो चुकी सरकारें ही बाज़ार की तेज़ी दिखाकर अपनी नाकामी पर परदा डालती हैं। दरअसल, अभी अपने यहां बाज़ार में जैसी तेज़ी चल रही है, वह सेटीमेंट की वजह से है और सेंटीमेंट तब बनता है जबऔरऔर भी

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने हमारे शेयर बाज़ार के कैश सेगमेंट में बजट के दिन 10,168.32 करोड़ रुपए और कल 13,585.57 करोड़ रुपए (दो दिन में 23,753.89 करोड़ रुपए) झोंके हैं। उन्होंने यह धन लगभग शून्य ब्याज पर उठाया है। वित्त मंत्री सीतारमण का नया बजट भी भरपूर उधारी पर टिका है। वित्त वर्ष 2021-22 में सरकार बाज़ार से 12 लाख करोड़ रुपए का भारी-भरकम उधार लेने जा रही है, जबकि टैक्स से 15.45 लाख करोड़ रुपए औरऔरऔर भी

बजट ने शेयर बाज़ार में जबरदस्त उन्माद पैदा कर दिया। सेंसेक्स 5% उछल गया। आखिर इस उन्माद का आधार क्या है? बजट का मूल स्वर तो राजनीति में बाज़ी मारने का है। जिन राज्यों में अगले साल तक चुनाव होने हैं, उनके लिए खास घोषणाएं की गई हैं। वित्त मंत्री के बजट भाषण में स्वास्थ्य पर खर्च 137% बढ़ाकर 2,23,846 करोड़ रुपए कर देने का दावा किया गया है। लेकिन बजट दस्तावेज में खर्च 82,445 करोड़ रुपए से घटाकर 74,602 करोड़ रुपए कर दिया गया है। अब मंगलवार की दृष्टि…और भी

आज 11 बजे से लोकसभा में वित्त मंत्री का बजट भाषण शुरू हो जाएगा। लेकिन दरअसल, शेयर बाज़ार के लिए आज बजट का नहीं, बेचने का दिन है। दुनिया भर के शेयर बाजारों में स्वीकृत मान्यता है कि उम्मीद पर खरीदो और खबर आने पर बेच दो। इसलिए समझदारी इसमें है कि जिन-जिन उम्मीदों पर ट्रेडरों ने पिछले 15-20 दिन में खरीद की हो, वे उम्मीदें आज पूरी हों या न हों, उन्हें बेचकर निकल जाना चाहिए।औरऔर भी

बजट से इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र को कोई खास उम्मीद नहीं। बीएसई इंफास्ट्रक्चर सूचकांक का पी/ई अनुपात फिलहाल 15.32 है, जबकि सेंसेक्स का पी/ई अनुपात 31.96 पर। तम्बाकू, सिगरेट व शराब कंपनियों पर हर बजट में टैक्स बढ़ता है तो उनके शेयर घबराए-घबराए चल रहे हैं। साथ ही आम लोगों को 80-सी के तहत टैक्स राहत बढ़ने की उम्मीद है तो जीवन व स्वास्थ्य बीमा कंपनियों के स्टॉक्स इधर मुस्करा रहे हैं। वैसे भी, इधर वर्क-टू-होम से घरेलू बचत बढ़ गई है। सोमवार को आ रहा है बजट। फिलहाल शुक्रवार का अभ्यास…और भी

बजट से कुछ खास पाने की उम्मीद में रीयल एस्टेट कंपनियों के शेयर भी पिछले दिनों बढ़ते गए हैं। कभी इंडियाबुल्स रीयल एस्टेट 12% बढ़ गया तो कभी ओबेरॉय रियल्टी और गोदरेज प्रॉपर्टीज़ 7-8% बढ़ गए। किसानों का मुद्दा गरम है तो उन्हें शांत करने के बहाने फर्टिलाइजर सब्सिडी बढ़ाई जा सकती है। इसी उम्मीद में कभी ग्रासिम बढ़ता है तो कभी कोरोमंडल इंटरनेशनल। फार्मा व हेल्थकेयर स्टॉक्स तो पिछले कई महीनों से बढ़े जा रहे हैं। जेरनिक दवा कंपनियों को बजट से विशेष उम्मीद है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…और भी

ऑक्सफैम की रिपोर्ट बताती है कि कोरोना प्रकोप के बीच मार्च 2020 में लॉकडाउन लगने के बाद देश के शीर्ष 100 अरबपतियों की आय 12,97,822 लाख करोड़ रुपए बढ़ गई। जब उद्योग व सेवा क्षेत्र की सारी गतिविधियां ठप थीं, तब आखिर इतना धन उनके पास आया कहां से, जिससे 13.8 करोड़ निर्धनतम भारतीयों को 94,045 रुपए का चेक मुफ्त में दिया जा सकता है? इस दौरान एफएमसीजी, दवा और ऑनलाइन रिटेल के अलावा केवल शेयर बाज़ार ही चल रहा था! कितना कमाया होगा बाज़ार से? अब बुधवार की बुद्धि…और भी

अगले सोमवार को बजट का दिन है। फिलहाल बाज़ार में कयास जारी हैं कि उसमें क्या-क्या हो सकता है। भांति-भांति की उम्मीदें तैर रही हैं। मसलन यह कि इस बार ऑटोमोबाइल उद्योग को खास राहत दी जा सकती है। इससे दोपहिया से लेकर कार व कमर्शियल वाहन बनानेवाली कंपनियों को फायदा होगा तो इनके शेयरों में जमकर खरीद हो रही है। नतीजतन, बीते हफ्ते 18 से 22 जनवरी के बीच निफ्टी ऑटो सूचकांक 5.57% बढ़ चुका है। बाज़ार इसी तरह बजट उम्मीदों की झांकी दिखाता है। अब सोमवार का व्योम…और भी