शेयर बाज़ार में सक्रिय शक्तियों के संतुलन और उनकी हरकतों को ठीक से समझे बगैर रिटेल ट्रेडर दलाल स्ट्रीट से सही-सलामत नहीं निकल सकता। ये शक्तियां किसी मशीन, अल्गोरिदम या कंप्यूटर सॉफ्टवेयर में नहीं, बल्कि इनके पीछे काम कर रहे इंसानों में निहित हैं। शक्तियों का संतुलन समझना है तो हमें वहां सक्रिय इंसानों के ट्रेडिंग व्यवहार व स्वभाव को बारीकी से देखना होगा। उनका पैटर्न समझना होगा। हमारी पूंजी बहुत सीमित है, जबकि उनके पास इफरातऔरऔर भी

जीवन की तरह शेयर बाज़ार में भी कुछ शाश्वत या हमेशा के लिए नहीं होता। इंट्रा-डे वोलैटिलिटी भी धीरे-धीरे पहले की तरह सामान्य रेंज में आती जा रही है। लेकिन जब तक असामान्य है, तब तक इंड्रा-डे ट्रेडर उसका फायदा उठा सकते हैं। मगर ध्यान रहें कि ज्यादा कमाने के फेर में कहीं अपनी ट्रेडिंग पूंजी न गंवा बैठें। ट्रेडर की पूंजी ही उसका सहारा होती है। यह डूब गई तो कमाने का साधन ही खत्म होऔरऔर भी

दैनिक वोलैटिलिटी ज्यादा हो, सही स्टॉक चुन लिया जाए और दिशा सटीक पकड़ में आ जाए तो इंट्रा-डे ट्रेडर कम शेयर खरीदकर कमाई का लक्ष्य हासिल कर सकता है। किसी को दिन में 5000 रुपए कमाने हैं और स्टॉक एक दिन में 10 रुपए बढ़ता है तो वह उसके 500 शेयर खरीद-बेचकर यह लक्ष्य हासिल कर लेगा। वहीं, अगर स्टॉक दो रुपए बढ़ता है तो उसे 2500 शेयर खरीदने होंगे। व्यावहारिक रूप से क्या तरीका होगा, यहऔरऔर भी

स्टॉक का बीटा अगर एक तो वह निफ्टी से लयताल मिलाकर चलता है। एक से कम तो इसमें निफ्टी से कम उछल-कूद। एक से ज्यादा तो निफ्टी से ज्यादा हलचल। मसलन, एचडीएफसी का बीटा 0.96, इनफोसिस का 0.58 तो टाटा मोटर्स का सीधे 2.23 और रिलायंस इंडस्ट्रीज़ का बीटा एक है। ज्यादा बीटा बाज़ार की तुलना में ज्यादा रिस्क दिखाता है। इंट्रा-डे ट्रेडर एक से ज्यादा बीटा वाले टाटा मोटर्स जैसे स्टॉक में ज्यादा कमा सकते हैं।औरऔर भी

जो जैसा है, उसे दूसरों से बेहतर देख लेना। उसके हिसाब से खरीदने-बेचने का सौदा करना। यही शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग से कमाने का केंद्रीय सूत्र है। बाकी इधर-इधर की झांकी है। इधर, इंट्रा-डे वोलैटिलिटी बढ़ी हुई है (दो दिन से यह ट्रेन्ड थमता हुआ दिख रहा है) तो इस देख-समझकर ट्रेडिंग रणनीति बनानी होगी। निफ्टी दिन में 200-300 अंक का फेरा मार रहा है तो पता लगाएं कि उसमें कौन-से स्टॉक्स हैं जिनमें ज्यादा हलचल मचऔरऔर भी

इस समय बाज़ार की दैनिक वोलैटिलिटी पहले से दोगुनी हो गई है। निफ्टी इंट्रा-डे अमूमन 200-300 अंकों का चक्कर काटता रहा है। हम इसका कारण जान लें, तब भी उसे बदल नहीं सकते। इसलिए ट्रेडरों, खासकर इंट्रा-डे ट्रेडरों के लिए बेहतर होगा कि वो इससे मुनाफा कमाने की जुगत खोज निकाले। होश रहे कि निफ्टी हवा में लटका सूचकांक नहीं है। वो 50 स्टॉक्स का सम्मिलित व्यक्तित्व है। वो अगर दिन में 200-300 अंक उठता-गिरता है तोऔरऔर भी

इंडिया वीआईएक्स से निफ्टी के दैनिक दायरे की गणना कैसे करते हैं? मसलन, इस साल 13 दिन की छुट्टी घटाकर 249 दिन ट्रेडिंग होनी है। 249 का वर्गमूल 15.78 हुआ। इंडिया वीआईएक्स कल 21.96 रहा है। इसे 15.78 से भाग दें तो उत्तर 1.39 निकला। इससे ट्रेडर निष्कर्ष निकालते हैं कि मौजूदा दौर में एक दिन से दूसरे दिन के बीच निफ्टी 1.39% तक ऊपर-नीचे जा सकता है। दिक्कत यह है कि इस गणना में इसका कोईऔरऔर भी

इंडिया वीआईएक्स का निचला स्तर 10 का है, जबकि ऊपरी स्तर 80-90 तक जा सकता है। पिछले साल 24 मार्च को यह 86.35 तक ऊपर चला गया था, जबकि 17 दिसंबर को यह 14.05 पर 52 हफ्तों के न्यूनतम स्तर पर था। फिलहाल गिरते-गिरते 20-30 की रेंज में चल रहा है। सिद्धांततः माना जाता है कि यह सूचकांक 10-15 की रेंज में है तो बाज़ार में घबराहट बहुत कम है और 50-60 की रेंज या इससे ऊपरऔरऔर भी

शेयर बाज़ार की वोलैटिलिटी/चंचलता नापने के लिए आमतौर पर इंडिया वीआईएक्स सूचकांक का इस्तेमाल किया जाता है। वीआईएक्स की शुरुआत मूलतः शिकागो बोर्ड ऑफ एक्सचेंज (सीबीओई) ने बाज़ार में व्याप्त डर, घबराहट व अनिश्चितता को मापने के लिए 1993 में की थी। उसके बाद इसके फॉर्मूले को 2003 में अपडेट किया गया। भारत में एनएसई इसका इस्तेमाल सीबीओई के लाइसेंस के तहत करता है। इंडिया वीआईएक्स की गणना निफ्टी ऑप्शंस के वर्तमान और अगले महीने के भावोंऔरऔर भी

करीब साल भर पहले जब से शेयर बाज़ार को कोरोना का ज़ोर का झटका लगा है, तब से वो दिन में ज्यादा ही उछल-कूद मचाने लगा है। पहले निफ्टी-50 दिन भर में 80-100 अंकों का चक्कर काटता था। लेकिन अब वो औसतन 200-350 अंक ऊपर-नीचे होता है। मसलन, शुक्रवार को निफ्टी-50 का दायरा 250 अंकों का रहा है। इसे तकनीकी भाषा में ‘वोलैटिलिटी’ कहते हैं। बाज़ार के लिए इतनी ज्यादा दैनिक वोलैटिलिटी कोरोना के झटके ससे उभरीऔरऔर भी