देश का सबसे बड़ा बैंक एसबीआई नए वित्त वर्ष में अपनी पहुंच देश के दूरदराज के इलाकों तक बढ़ाने के लिए 15,000 नए बैंकिंग संवाददाताओं (बीसी) की नियुक्ति करेगा। यह जानकारी खुद बैंक के चेयरमैन व प्रबंध निदेशक ओ पी भट्ट ने एक प्रमुख अंग्रेजी आर्थिक अखबार से हुई बातचीत में दी। इससे बैंक ग्रामीण इलाकों में अपनी पैठ मजबूत करना चाहता है। बैंकिंग संवाददाता को बढ़ाना वित्तीय समावेश को व्यापक बनाने के लक्ष्य का एक हिस्साऔरऔर भी

नए वित्त वर्ष 2010-11 का पहला दिन बैंकों में अपना पैसा बचत खाते में रखनेवाले करोड़ों आम लोगों के लिए शानदार तोहफा लेकर आया है। इस खाते पर ब्याज की दर तो पहले की तरह 3.5 फीसदी सालाना ही है। लेकिन अब इसे हर दिन के बैलेंस पर गिना जाएगा, जबकि अभी तक बैंक महीने की 10 तारीख और आखिरी तारीख तक खाते में सबसे कम बैलेंस राशि पर ब्याज देते रहे हैं। इसलिए पहले जहां बचतऔरऔर भी

देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई (भारतीय स्टेट बैंक) ने सस्ते या टीजर होम लोन की स्कीम 30 अप्रैल 2010 तक बढा दी है। पहले यह स्कीम 31 मार्च 2010 को खत्म होनी थी। इस स्कीम के तहत होम लोन लेनेवाले को पहले साल केवल 8 फीसदी सालाना की दर से ब्याज देना होता है। अभी तक दूसरे व तीसरे साल ब्याज की दर 8.5 फीसदी रखी गई है। लेकिन 1 अप्रैल या उसके बाद होम लोनऔरऔर भी

केंद्र सरकार नए वित्त वर्ष में बाजार से लिए जानेवाले उधार का बड़ा हिस्सा सितंबर 2010 तक जुटा लेगी। रिजर्व बैंक द्वारा घोषित कैलेंडर के मुताबिक पहली छमाही में 2.87 लाख करोड़ रुपए के सरकारी बांड जारी किए जाएंगे। बता दें कि इन बांडों में वैसे तो आम निवेशक भी पैसा लगा सकते हैं। लेकिन अभी तक तकरीबन सारा निवेश बैंक, बीमा कंपनियां या म्यूचुअल फंड व कॉरपोरेट इकाइयां ही करती रही है। रिजर्व बैंक की तरफऔरऔर भी

पहले प्रस्ताव था कि 1 अप्रैल 2010 से बैंकों के सभी तरह के लोन पर बेस रेट की नई पद्धति लागू कर दी जाएगी। लेकिन बैंकों के शीर्ष अधिकारियों से राय-मशविरे के बाद रिजर्व बैक ने इसे अब 1 जुलाई 2010 से लागू करने का फैसला किया है। यह फैसला शुक्रवार को लिया गया। इस नई पद्धति के लागू होने पर अभी तक लागू बीपीएलआर (बेंचमार्क प्राइम लेंडिंग रेट) पद्धति धीरे-धीरे खत्म हो जाएगी। बीपीएलआर के साथऔरऔर भी

करेंट एकाउंट (सीए) यानी चालू खाते और सेविंग एकाउंट (एसए) यानी बचत खाते को मिला दें तो बनता है सीएएसए यानी कासा। बैंक की कुल जमाराशि में कासा जमा का हिस्सा कितना है, इससे उसकी लागत पर बहुत फर्क पड़ता है। चालू खाते मुख्तया कंपनियां, फर्में व व्यापारी व उद्यमी रखते हैं जो हर दिन खाते से काफी लेन-देन करते हैं। जबकि बचत खाते में हमारे-आप जैसे आम लोग अपना धन जमा रखते हैं और इसका इस्तेमालऔरऔर भी

इस साल अभी तक स्थिति यह रही है कि बैंक हर दिन औसतन 1.09 लाख करोड़ रुपए रिजर्व बैंक के पास रिवर्स रेपो की सुविधा के तहत जमा कराते रहे हैं जिस पर उन्हें महज 3.25 फीसदी सालाना की दर से ब्याज मिलता है। बैंकिंग सिस्टम में इस राशि को अतिरिक्त तरलता माना जाता है। यह वह राशि है जो आम लोगों से लेकर औद्योगिक क्षेत्र को उधार देने और विभिन्न माध्यमों में निवेश करने के बादऔरऔर भी

देश के बैक सड़क से लेकर बिजली जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र को ऋण देते-देते परेशान हो गए हैं। इस साल उन्होंने कुल मिलाकर उद्योग क्षेत्र को 14 फीसदी ही ज्यादा कर्ज दिया है जिसके चलते रिजर्व बैंक को कर्ज में इस वृद्धि का लक्ष्य 18 से घटाकर 16 फीसदी करना पड़ा है। लेकिन इस दौरान इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र को बैंकों से मिले कर्ज में 46 फीसदी की शानदार वृद्धि हुई है। यह कहना है खुद रिजर्व बैंक के डिप्टीऔरऔर भी

मंदी से मुक्त माना जानेवाला माइक्रो फाइनेंस क्षेत्र भी अब आर्थिक सुस्ती का शिकार हो गया है। इस क्षेत्र को बैंकों से मिलनेवाला धन कुछ साल पहले तक मिल रहे धन का अब मामूली हिस्सा रह गया है। बैंक माइक्रो फाइनेंस संस्थाओं (एमएफआई) को बगैर बैलेंस शीट देखे कर्ज देने से मना कर रहे हैं। इससे छोटी एमएफआई के लिए भारी मुसीबत पैदा हो गई है क्योंकि वे आमतौर पर बैलेंस शीट नहीं बनाती। केवल बड़ी एमएफआईऔरऔर भी