भारतीय कंपनियों में शीर्ष पदों पर 14% महिलाएं हैं। यह अनुपात दुनिया भर के औसत 21% से कम है। लेकिन साल भर पहले तो भारतीय कॉरपोरेट जगत में शीर्ष पदों पर महिलाओं की संख्या महज 9% थी, जबकि दुनिया का औसत आंकड़ा 20% था। इस तरह एक साल के भीतर भारत ने काफी तेज प्रगति की है। ग्रांट थार्नटन की अंतरराष्ट्रीय बिजनेस रिपोर्ट के मुताबिक यही नहीं, भारत की 66% कंपनियां महिला कर्मचारियों को उनके माफिक कामऔरऔर भी

भारतीय मानक ब्‍यूरो (बीआईएस) ने जनवरी 2012 तक सोने के आभूषणों की हॉलमार्किंग के लिए 9156 और चांदी के आभूषणों के लिए 537 लाइसेंस जारी किए हैं। देश में जल्दी ही सोने व चांदी के आभूषणों की हॉलमार्किंग जरूरी करने का प्रस्ताव है। बीआईएस की योजना आभूषणों की परख करने और हॉलमार्क लगाने के केंद्रों के लिए लाइसेंस जारी करने की भी है ताकि छोटे स्वर्णकार वहां से अपने आभूषणों की हॉलमार्किंग करवा सकें। ब्‍यूरो 31 जनवरीऔरऔर भी

अमेरिका में भारत के नियंत्रक व महालेखा परीक्षक (सीएजी) की तर्ज पर जीएओ नाम की संस्था काम करती है। इसे पहले जनरल एकाउंटिंग ऑफिस कहा जाता था। लेकिन साल 2002 से अमेरिकी संसद ने इसका काम व नाम बदलकर गवर्नमेंट एकाउंटेबिलिटी ऑफिस कर दिया। अमेरिका के मौजूदा महानियंत्रक जीन डोदारो हैं। वहां जीएओ प्रमुख का कार्यकाल 15 साल का है। डोदारो की नियुक्ति इस पद पर डेढ़ साल पहले हुई थी और उनका बाकी कार्यकाल करीब 13.5औरऔर भी

इस समय देश में व्यक्तिगत आयकर देनेवाले लोग कुल तीन करोड़ हैं। इनमें से 2.02 करोड़ की सालाना आय दो लाख रुपए तक है। 56.73 लाख लोगों की सालाना आय दो से चार लाख रुपए है। चार से दस लाख रुपए तक सालाना आय के करदाता 36.07 लाख हैं। दस से बीस लाख कमानेवालों की संख्या 3.35 लाख है। साल में 20 लाख रुपए से ज्यादा कमानेवालों की संख्या केवल 1.85 लाख है। इन्होंने बीते वित्त वर्षऔरऔर भी

रिजर्व बैंक ने साल 2010-11 में कागज के नोटों की छपाई पर कुल 2376 करोड़ रुपए खर्च किए। एक हज़ार का नोट छापने का कुल खर्च 3.17 रुपए आता है, जबकि पांच रुपए के नोट का खर्च 48 पैसे है। आनुपातिक रूप से पांच रुपए का नोट छापना सबसे महंगा है क्योंकि उसकी लागत अंकित मूल्य की 9.6 फीसदी है, जबकि यह अनुपात हज़ार रुपए के नोट के मामले में केवल 0.32 फीसदी है। देश में कागजऔरऔर भी

नए वित्त वर्ष 2012-13 में केंद्र सरकार के 17 बड़े उपक्रम 1.40 लाख करोड़ रुपए का निवेश करेंगे। देश में पहली पंचवर्षीय योजना के दौरान केंद्रीय सार्वजनिक उद्यमों की संख्या मात्र पांच थी। अब तक बढ़कर यह 250 हो गई है। इनमें से इंडियन ऑयल का टर्नओवर देश में सबसे ज्यादा, ओएनजीसी का मुनाफा सबसे ज्यादा, एनटीपीसी सबसे बड़ी सार्वजनिक सेवा कंपनी और कोल इंडिया सबसे ज्यादा बाज़ार पूंजीकरण वाली कंपनी है। इनमें से कुछ कंपनियां दुनियाऔरऔर भी

भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) सोने के आभूषणों की हॉलमार्किंग के लिए 31 दिसंबर 2011 तक 9005 लाइसेंस जारी कर चुका है, जबकि चांदी के आभूषणों के लिए भी 528 लाइसेंस जारी किए गए है। सोने के आभूषणों के लिए हॉलमार्किंग को अनिवार्य बनाने का प्रयास जारी है। छोटे सुनारों की सुविधा के लिए बीआईएस ने देश भर में 170 हॉलमार्किंग केन्द्रों की पहचान की है। बीआईएस विभिन्न क्षेत्रों में अपने क्षेत्रीय कार्यालयों द्वारा हॉलमार्किंग के बारे मेंऔरऔर भी

टेक्सटाइल देश में कृषि के बाद सबसे ज्यादा रोज़गार देनेवाला क्षेत्र है। यह 3 करोड़ 50 लाख से ज्‍यादा लोगों को सीधे रोज़गार देता है। देश के कुल औद्योगिक उत्‍पादन में इसका योगदान 14 फीसदी, सकल घरेलू उत्‍पादन में 4 फीसदी और निर्यात से होने वाली आय में इसका योगदान 10.63 फीसदी है। 11वीं पंचवर्षीय योजना में 40 एकीकृत टेक्‍सटाइल पार्को को मंजूरी दी गई और इसके लिए 1400 करोड़ रुपए की राशि दी गई। राष्‍ट्रीय वस्‍त्रऔरऔर भी

राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य बीमा योजना के तहत जारी स्मार्ट कार्डों की संख्या 31 दिसंबर 2011 तक 2.57 करोड़ पर पहुंच चुकी है। इससे 29.25 लाख से ज्‍यादा लोग अस्‍पताल में भर्ती होने की सुविधा ले चुके थे। इस योजना को गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों के लिए अक्‍टूबर 2007 को शुरू किया गया था और अप्रैल 2008 से अमल में लाया गया। इसमें सालाना प्रीमियम का 75% भारत सरकार देती है, जबकि 25% राज्य सरकारें देती हैं।औरऔर भी

चीन अपने 6980 अरब डॉलर के जीडीपी का करीब 2.5% हिस्सा, 174.5 अरब डॉलर वैज्ञानिक शोध पर खर्च करता है। भारत इस मद में 1843 अरब डॉलर के जीडीपी का मात्र 0.9% हिस्सा, 16.5 अरब डॉलर खर्च करता है। चीन ने 2020 तक खर्च बढ़ाकर जीडीपी का 3% करने का लक्ष्य रखा है, जबकि भारत का लक्ष्य 2017 तक 2% पर पहुंचने का है। चीन ने 2010 में वैज्ञानिक शोध से जुड़े 9,69,315 पेपर प्रकाशित किए, जबकिऔरऔर भी