सरकारी मंजूरियां देश में बिजनेस करनेवालों के जी का जंजाल बनी हुई है। एक एमएसएमई इकाई शुरू करने के लिए बार-बार 57 अनुपालन और केवल पर्यावरण, स्वास्थ्य व सुरक्षा से जुड़े 18 विभिन्न अधिकारियों से 17 अनुमोदन/लाइसेंस लेने पड़ते हैं। हमारे कानून में उद्योग-धंधे संबंधी 75% रेग्य़ुलेशन ऐसे हैं जिनमें जेल तक की सज़ा का प्रावधान है। तमाम सरकारी एजेंसियां बिजनेस करनेवालों से डरा-धमकाकर वसूली करती रहती हैं। भ्रष्टाचार को पालते-पोसते ऐसे माहौल के ऊपर हर बिजनेस इकाई को प्रत्यक्ष और परोक्ष टैक्स की मार झेलनी पड़ती है। उद्यमियों की शिकायत हैं कि टैक्स अधिकारी टारगेट पूरा करने के नाम पर धमकियां देते और परेशान करते हैं। यह ‘टैक्स-आतंकवाद’ उद्यमियों को बड़ा होने और औपचारिक अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनने से रोकता है। आज भी हमारी अर्थव्यवस्था या जीडीपी का 20% हिस्सा भ्रष्टाचार और कायदे-कानून तोड़कर आ रहा है। टैक्स-आतंक के शिकार स्टार्ट-अप और नए उद्यमी भी बन रहे हैं। मसलन, फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म टैवलखाना के खाते एजेंल निवेश पर टैक्स के बहाने फ्रीज कर दिए गए और उससे ₹36 लाख टैक्स वसूल लिया गया। इसी तरह स्कूलडायरी नाम के उद्यम से ₹20 लाख टैक्स वसूला गया। हर तरफ से दबाव पड़ा तो एंजेल टैक्स 2024 के बजट में सरकार को खत्म करना पड़ा। अब बुधवार की बुद्धि…
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