हमारे शेयर बाज़ार की कमान भले ही कुछ दशकों से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के हाथों में चली गई हो। लेकिन इसकी गति अंततः ‘हम भारत के लोग’ ही तय करेंगे, क्योंकि विदेशी निवेशकों का हाल तो यही है कि गंजेड़ी यार किसके, दम लगाकर खिसके। वे तो मुनाफा कमाकर खिसक लेंगे। इसलिए यह जानना ज़रूरी हो जाता है कि फिलहाल हम भारतीयों की बैलेंस शीट या कहें तो वित्तीय आस्तियों और देनदारियों का क्या हिसाब चल रहा है। देश में कुल परिवारों की अनुमानित संख्या 29.4 करोड़ है। प्रति परिवार औसतन पांच लोग तो कुल आबादी करीब 146 करोड़। भारत सरकार के सांख्यिकी व कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय और रिजर्व बैंक ने भारतीय घरों की वित्तीय प्रोफाइल का नवीनतम डेटा वित्त वर्ष 2022-23 का जारी किया है। समय से दो साल पीछे का यह डेटा है। मगर, हमें इसी से काम चलाना पड़ेगा। इसके मुताबिक वित्त वर्ष 2022-23 में भारतीय घरों ने 29.7 लाख करोड़ रुपए की वित्तीय आस्तियां जोड़ीं, जबकि उनकी देनदारियों में 15.6 लाख करोड़ रुपए का इज़ाफा हो गया। दूसरे शब्दों में औसतन हर परिवार ने साल भर में एक लाख रुपए की वित्तीय आस्तियां हासिल कीं, जबकि इसी दौरान उसकी देनदारियां 53,000 रुपए बढ़ गईं। इससे आगे क्या? अब सोमवार का व्योम…
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