ईरान पर अमेरिका व इज़राइल के हमले ने न केवल वहां के सत्ता शीर्ष को खत्म कर दिया है, बल्कि सारी दुनिया में भूचाल ला दिया है। पूरा मध्य-पूर्व सुलझ रहा है। ट्रम्प ईरान के अवाम को सत्ता कब्ज़ा करने के लिए उकसा रहे हैं। लेकिन ईरान सरकार में नेतृत्व की दूसरी रैंक ने मोर्चा संभाल लिया है। उसके लिए यह राजनीति ही नहीं, विचारधारा की लड़ाई है। ईरान पर हमले का रूस और चीन, दोनों ने ही विरोध किया है। इस बीच दुनिया भर के वित्तीय बाज़ार सदमे में हैं। कच्चे तेल का दाम कल हमले के बाद 10% बढ़कर 80 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। जानकारों का मानना है कि यह जल्दी ही 100 डॉलर तक जा सकता है। गोल्डमैन सैक्श का अनुमान तो 110 डॉलर और जेपी मॉर्गन का 120–130 डॉलर तक का है। मिलिट्री हमले खुद ही तेल की कीमतों में आग लगाने के लिए काफी हैं। ऊपर से होर्मुज स्ट्रेट का बंद होना दुनिया भर में ऊर्जा संकट पैदा कर सकता है। अभी तक हर दिन करीब दो करोड़ बैरल तेल होर्मुज़ स्ट्रेट से गुजरता रहा है। इस संकरे समुद्री रास्ते से दुनिया का 21% कच्चा तेल और लगभग 20% तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) गुजरती है। दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लगभग पांचवें हिस्से के रुक जाने का क्या असर होगा? शेयर बाज़ार में खुलते ही भारी गिरावट का अंदेशा है। अब सोमवार का व्योम…
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