अमेरिका से लेकर ब्रिटेन और जर्मनी तक, दुनिया के तमाम देश अपने हितों को सबसे ऊपर रखकर भारत से व्यापार वार्ता और संधि कर रहे हैं। चीन तक अपने उद्योगों के हित में भारत का इस्तेमाल कर रहा है। लेकिन भारत का हित आज हाशिए पर पड़ा है क्योंकि यहां करीब 12 सालों से ऐसी सरकार चल रही है जिसके लिए भारत का हित मतलब अडाणी जैसे उन चंद यारों का हित हो गया है जो उसे सत्ता में आने और बने रहने में मदद करते रहे हैं। सरकार इनके अलावा और किसी का हित नहीं देखती। कहती ज़रूर है कि उसके लिए 140 करोड़ देशवासियों का हित सबसे ऊपर है। लेकिन हकीकत में उसने जीएसटी लगाकर इन 140 करोड़ देशवासियों को टैक्स जुटाने का ज़रिया भर बना दिया है। नहीं तो रूस से सस्ते कच्चे तेल आयात और अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल का दाम 60-65 डॉलर प्रति बैरल हो जाने के बावजूद पेट्रोल 104 रुपए और डीजल 92 रुपए प्रति लीटर में नहीं मिल रहा होता। देश के सामने बार-बार मौके आए कि वो विश्व व्यापार में अपना हिस्सा बढ़ा ले। कोरोना के फौरन बाद ‘चाइना प्लस वन’ नीति ने मौका दिया। लेकिन वो मौका वियतनाम, बांग्लादेश व इंडोनेशिया जैसे छोटे देश छीन ले गए। विश्व व्यापार में माल व सेवाओं, दोनों को मिला दें तो भारत का हिस्सा सालों-साल से 2.4-2.6% पर ही अटका हुआ है। यह बदहाली क्यों? अब बुधवार की बुद्धि…
यह कॉलम सब्सक्राइब करनेवाले पाठकों के लिए है.
'ट्रेडिंग-बुद्ध' अर्थकाम की प्रीमियम-सेवा का हिस्सा है। इसमें शेयर बाज़ार/निफ्टी की दशा-दिशा के साथ हर कारोबारी दिन ट्रेडिंग के लिए तीन शेयर अभ्यास और एक शेयर पूरी गणना के साथ पेश किया जाता है। यह टिप्स नहीं, बल्कि स्टॉक के चयन में मदद करने की सेवा है। इसमें इंट्रा-डे नहीं, बल्कि स्विंग ट्रेड (3-5 दिन), मोमेंटम ट्रेड (10-15 दिन) या पोजिशन ट्रेड (2-3 माह) के जरिए 5-10 फीसदी कमाने की सलाह होती है। साथ में रविवार को बाज़ार के बंद रहने पर 'तथास्तु' के अंतर्गत हम अलग से किसी एक कंपनी में लंबे समय (एक साल से 5 साल) के निवेश की विस्तृत सलाह देते हैं।
इस कॉलम को पूरा पढ़ने के लिए आपको यह सेवा सब्सक्राइब करनी होगी। सब्सक्राइब करने से पहले शर्तें और प्लान व भुगतान के तरीके पढ़ लें। या, सीधे यहां जाइए।
अगर आप मौजूदा सब्सक्राइबर हैं तो यहां लॉगिन करें...
