न डर का सन्निपात, न लालच का उन्माद

शेयर बाज़ार डर और लालच की आदिम भावनाओं से चलता है। अक्सर ये भावनाएं इतनी हावी हो जाती हैं कि कंपनियों की मूलभूत स्थिति कोई मायने ही नहीं रखती। कंपनी का कोई धंधा ही नहीं। है भी तो अभी चल नहीं रहा। फिर भी उसके शेयर आसमान छूने लगते हैं। अडाणी ग्रीन एनर्जी का शेयर इसका शानदार उदाहरण रहा है, जब सच्चाई को नज़रअंदाज़ लालच उसके सिर चढ़कर बोल रहा था। हालांकि कभी-कभी कंपनियों के प्रवर्तकों से जुड़े ऑपरेटर भी ऐसा खेल खेलते हैं। दूसरी तरफ यह भी होता है कि मूलभूत से मजबूत और बराबर अच्छे नतीजों के बावजूद कंपनियों के शेयर गिर जाते हैं। तब बाज़ार तथ्यों व सच से ज्यादा डर को तरजीह दे रहा होता है। लम्बे समय के निवेशकों को बाज़ार में छाए डर के चलते दबे हुए मूलभूत रूप से मजबूत स्टॉक्स या कंपनियों को पकड़ने की कोशिश करनी चाहिए। हो सकता है कि एकाध तिमाही के खराब नतीजों को बाज़ार ज्यादा ही बढ़ा-चढ़ाकर देख रहा हो। यह भी संभव है कि कुछ ऑपरेटर सायास उस स्टॉक को दबा रहे हों, जबकि कंपनी ने अपने उद्योग से बेहतर काम किया हो। आज तथास्तु में पेश है एक ऐसी ही दबी हुई कंपनी…

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