राष्ट्रवाद एक ऐसी पवित्र भावना व धारणा है जिसमें देश की अस्मिता, संप्रभुता, भूभाग, आर्थिक, सामाजिक व सांस्कृतिक हितों की रक्षा के लिए सब कुछ बलिदान कर दिया जाता है। फिर खुद को सबसे बड़ा राष्ट्रवादी बतानेवाली भाजपा, उसके सबसे ताकतवर व यशस्वी कहे जाने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार का यह कर्म कैसे व क्यों कि जब चीन गलवान घाटी में घुसपैठ कर भारत की हज़ारों किलोमीटर ज़मीन कब्जा कर लेता है तो मोदी बयान देते हैं कि न कोई घुसा है और न कहीं कब्जा हुआ है। अमेरिका भारत पर एकतरफा व्यापार की शर्तें थोप देता है। ट्रम्प कहता है कि भारत रूस से तेल खरीदेगा तो फिर से 50% टैरिफ लगा दिया जाएगा। जवाब में मोदी और उनके मंत्री हां-जी, हां-जी कहते फिर रहे हैं। देश में कृषि से जीविका चला रहे करोड़ों किसानों को अमेरिका में मशीन से खेती करते विशालकाय सब्सिडी पर फलते-फूलते मुठ्ठी भर किसानों का हित साधने के लिए तबाही के गर्त में धकेल दिया जाता है। 146 करोड़ देशवासियों का सारा डेटा बाकायदा बजट में घोषणा करके विदेशी कंपनियों के हवाले कर दिया जाता है। राष्ट्रवाद बोलकर राष्ट्रीय हितों की कुर्बानी क्यों? क्या राष्ट्रवाद की धारणा अब पूरी तरह मर चुकी है या संघ व भाजपा ने हिंदू राष्ट्रवाद का हल्ला मचाकर महात्मा गांधी की तरह भारतीय राष्ट्रवाद की भी हत्या कर दी है? अब शुक्रवार का अभ्यास…
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