हम एक ऐसे दौर में रह रहे हैं, जब हर देशवासी को हमारे राष्ट्रीय हितों को ठीक से जानना व समझना ज़रूरी है। नहीं तो केंद्र की सत्ता में बैठी सरकार कभी भी राष्ट्रीय हितों का नाम लेकर देश को भारी नुकसान पहुंचा सकती है। बजट में बड़ी मासूमियत से कहा गया कि डेटा केंद्रों में निवेश बढ़ाने और ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर की ज़रूरत को देखते हुए भारत में डेटा सेंटर की सेवाओं को इस्तेमाल करते हुए दुनिया के ग्राहकों को क्लाउड सेवाएं देनेवाली किसी भी विदेशी कंपनी को 2047 तक टैक्स से मुक्ति दी जाएगी। इससे असल में सीधे-सीधे गूगल और अमेज़ॉन जैसी अमेरिकी कंपनियो को मदद दी गई है। यही नहीं, इन डेटा केंद्रों में बिजली की भारी खपत होगी। इसके लिए परमाणु बिजली क्षेत्र को देशी-विदेशी निजी कंपनियों के लिए खोला जा चुका है। इसमें अडाणी समूह दिलचस्पी दिखा चुका है। अब उसे फायदा पहुंचाने के लिए बजट में परमाणु बिजली परियोजनाओं को 2035 तक ज़रूरी सामान के आयात को बेसिक कस्टम ड्यूटी से बरी कर दिया गया। सिविलियन, ट्रेनिंग व अन्य एयरक्राफ्ट बनाने में लगनेवाले कलपुर्जों से कस्टम ड्यूटी हटा दी गई है। साथ ही डिफेंस क्षेत्र में एयरक्राफ्ट के रखरखाव संबंधी कच्चे माल को कस्टम ड्यूटी नहीं देनी होगी। ये तीनों ही उपायों से भारत के राष्ट्रीय हित से ज्यादा अमेरिका का हित साधा गया है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…
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