बजट में एक तरफ वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दावा किया कि उनकी सरकार ने एक दशक तक चले सतत व सुधार-उन्मुख प्रयासों से लगभग 25 करोड़ लोगों को बहु-आयामी गरीबी से बाहर निकाल लिया। दूसरी तरफ देश के 81.35 करोड़ गरीबों को महीने में पांच किलो मुफ्त राशन देने की प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के लिए बजट प्रावधान ₹2.03 लाख करोड़ से बढ़ाकर ₹2.27 लाख करोड़ कर दिया गया। साथ ही उर्वर भूमि को जहरीली बना रही उर्वरक सब्सिडी भी ₹1.68 लाख करोड़ से बढ़ाकर ₹1.71 लाख करोड़ कर दी गई। इस तरह खाद्य व उर्वरक सब्सिडी पर ₹53.47 लाख करोड़ के बजट का 7.44% हिस्सा (₹3.98 लाख करोड़) चला जाता है। क्या सरकार की रिफॉर्म एक्सप्रेस के 350 से ज्यादा सुधारों में इतने बड़े खर्च को दुरुस्त बनाने का कोई उपाय शामिल नहीं है? क्या इतनी बड़ी रकम को किसी उत्पादक मद में नहीं लगाया जा सकता या सरकार के लिए गरीबों और किसानों के वोट खरीदने के लिए इतनी सब्सिडी फेंकते रहना ज़रूरी है? कमाल का प्रपंच बजट में इसके बाद किया गया है। कहा गया कि इन 25 करोड़ लोगों को सेवा क्षेत्र में नियोजित करने के उपाय किए जा रहे हैं ताकि युवा भारत की आकांक्षाओं को पूरा किया जा सके। सरकार ‘शिक्षा से रोज़गार व उद्यम’ पर एक स्थाई समिति बनाएगी। अब मंगलवार की दृष्टि…
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