नारों व घोषणाओं की विकट भूल-भुलैया में उलझे देशवासियों को बजट से ज्यादा नहीं तो थोड़े सार्थक समाधान की उम्मीद ज़रूर थी। लेकिन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नए वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में ऐसे समाधान पेश किए हैं, जिन पर केवल रोया सकता है। जैसे, देश से विदेशी निवेशकों का पलायन बड़ी समस्या है। इससे हमारा रुपया भी डॉलर के मुकाबले तलहटी पकड़ता जा रहा है, वो भी तब, जब डॉलर खुद दुनिया की प्रमुख मुद्राओं के सापेक्ष चार साल के न्यूनतम स्तर पर है। सीतारमण ने विदेशी निवेशकों के निकलने की भरपाई अनिवासी भारतीयों के निवेश से करने का प्रावधान किया है। अब भारत से बाहर रह रहे लोगों (पीआरओआई) के लिए पोर्टफोलियो निवेश स्कीम के तहत देश की लिस्टेड कंपनियों में प्रति कंपनी निवेश की व्यक्तिगत सीमा 5% से बढ़ाकर 10 और सामूहिक सीमा 10% से बढ़ाकर 24% कर दी गई है। अनिवासी भारतीयों (एनआरआई) को अचल संपत्ति के बेचने के लिए टैन नंबर की ज़रूरत नहीं होगी। केवल खरीदार का पैन नंबर काफी होगा। एनआरआई को विदेशी आस्तियों की घोषणा की स्कीम भी लाकर लुभाने की कोशिश की गई है। बता दें कि अनिवासी भारतीयों ने 2024-25 में देश में 135.46 अरब डॉलर भेजे हैं। हमारे आगे मेक्सिको (68 अरब डॉलर) और चीन (48 अरब डॉलर) बौने दिखते हैं। अब सोमवार का व्योम…
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