इस समय दुनिया में भारत की स्थिति गांव में गरीब की लुगाई जैसी हो गई है जिसे हर कोई मजे में छेड़कर चला जाता है। ट्रम्प ने पहले 25% के ऊपर 25% और टैरिफ लगाकर अपनी शर्तें मनवा ली। अब 25% अतिरिक्त टैरिफ हट भी गया तो अमेरिका 25% तो लगाएगा ही। यूरोपीय संघ दूसरे तरीके से मजे ले रहा है। एक तरफ यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला फॉन डेर लायन कहती हैं कि यूरोपीय संघ भारत के साथ ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ जैसे संधि करने जा रहा है, दूसरी तरफ यूरोपीय संघ ने भारत के लगभग 87% निर्यात को अब तक जीएसपी (जनरलाइज्ड स्कीम ऑफ प्रेफरेंस) के तहत टैरिफ में मिल रही रियायत 31 दिसंबर 2028 तक खत्म कर दी है। नई व्यापार संधि हो भी गई, तब भी भारत को यह सहूलियत एक साल तक नहीं मिल सकती है। चीन तो पहले ही भारत के सिर चढ़कर बैठा है। हमारे मैन्यूफैक्चरिंग व औद्योगिक क्षेत्र पर वह प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से करीब-करीब कब्ज़ा कर चुका है। रेलवे वैगन के लिए आयात की जा रही एक्सेल व ह्वील्स में चीन का हिस्सा 2018-19 के 62% से बढ़कर अब 90% हो चुका है। फार्मा उद्योग की 59 उत्पाद श्रेणियों में कमोबेश सारा आयात चीन से होता है। 90% से ज्यादा एलसीडी व ओएलईडी जैसे डिस्प्ले उत्पाद और 75-90% फरनेस, ओवन व परसनल कंप्यूटर चीन से आयात होते हैं। अब मंगलवार की दृष्टि…
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