आज के हालात में भारत में कमाना बड़ी-बड़ी कंपनियों के लिए भी मुश्किल हो गया है। दिसंबर तिमाही के ताज़ा वित्तीय नतीजे पस्ती की हालत का दस्तावेज़ बन गए हैं। जिन आईटी कंपनियों का दायरा विदेश तक फैला हुआ है, उन तक के नतीजे उम्मीद से खराब रहे हैं। इनमें टीसीएस, इन्फोसिस, एचसीएल टेक, विप्रो, टेक महिंद्रा और एलटीआई माइंडट्री शामिल हैं। रिलायंस इंडस्ट्रीज़ और आईसीआईसीआई बैंक तक ने निराश किया है। रिलायंस रिटेल का धंधा दबने से पूरी रिलायंस इंडस्ट्रीज़ उम्मीद पर खरी नहीं उतर सकी। शेयर बाज़ार में बराबर पस्ती का आलम है। चिंता की बात तो यह है कि जिनका धंधा कभी मंदा नहीं पड़ता, जहां दुनिया में सबसे कम छुट्टियां और सबसे ज्यादा ट्रेडिंग होती है, उस शेयर व कमोडिटी बाज़ार से जुड़ी लिस्टेड कंपनियों तक की हालत खस्ता है। प्रमुख स्टॉक एक्सचेंज बीएसई लिमिटेड, दोनों डिपॉजिटरी कंपनियों सीडीएसएल व एनएसडीएल और कमोडिटी एक्सचेंज एमसीएक्स के शेयर पिछली चार तिमाहियों से 50 से ज्यादा पी/ई पर ट्रेड हो रहे हैं। मतलब, उनका प्रति शेयर मुनाफा (ईपीएस) इतना कम है कि ठीक-ठाक भाव पर ट्रेड होने के लिए उनके शेयरों को गुब्बारा बना दिया गया है। अब तथास्तु में आज की कंपनी…
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