भारत के खिलाफ टैरिफ डोनाल्ड ट्रम्प ने लगाया है। लेकिन अग्निपरीक्षा 11 साल से देश की सरकार चला रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आर्थिक नीतियों की हो रही है। सवाल उठ रहा है कि क्या सचमुच मोदी सरकार की कोई आर्थिक नीति है भी या सब कुछ हवाबाज़ी और जुमला है। नहीं तो ऐसा कैसे होता कि भारत की जो कृषि पूरी तरह राम-भरोसे है, उसकी सालाना चक्रवृद्धि दर (सीएजीआर) वित्त वर्ष 2019-20 से 2024-25 तक पांच सालों में 4.72% रही है, जबकि जो मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र पूरी तरह मोदी सरकार की नीतियों के अधीन है, वो उक्त पांच सालो में कृषि से भी कम 4.04% की सीएजीआर से बढ़ा है। मोदी सरकार की मेक-इन इंडिया, स्किल इंडिया, स्टार्ट-अप इंडिया और स्टैंड-अप इंडिया जैसी नीतियां कारगर रही होतीं तो मैन्यूफैक्चरिंग की यह दुर्गति नहीं होती। अमेरिका के साथ जो देश मोलतोल कर ले रहे हैं, वे टैरिफ कम करवा ले रहे हैं। लेकिन भारत के पास मोलतोल करने की कोई शक्ति ही नहीं है। ट्रम्प ने बराबर देखा कि मोदी सरकार की रीढ़ की हड्डी गायब है, चाहे वह भारतीयों को हथकड़ी-बेड़ी लगाकर भेजने का मामला हो या सीजफायर पर सच बोलने का, तो उसने जैसे चाहा, वैसे भारत को हांकने लगा। ट्रम्प के फजीहत किए जाने के बाद अब हमारे विदेश मंत्रालय ने पलटकर जबाव दिया है। लेकिन महज बयानबाज़ी से क्या होगा? अब बुधवार की बुद्धि…
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