न्यूयॉर्क की ट्रेडिंग फर्म, जेन स्ट्रीट पर सेबी ने भारतीय शेयर बाज़ार में बैन इसलिए लगाया था क्योंकि उसने रिटेल निवेशकों से ₹4844 करोड़ की अवैध कमाई की थी। लेकिन आदेश के आठवें दिन ही बैन हटा लिया गया। सेबी ने जेन स्ट्रीट को ईमेल भेजकर कहा कि आप अवैध तरीके से कमाए गए ₹4844 करोड़ 14 जुलाई से पहले अलग एस्को खाता बनाकर डाल दें तो भारतीय शेयर बाज़ार में फिर से ट्रेडिंग कर सकते हैं। सेबी का ऐसा हृदय-परिवर्तन क्यों और क्या इससे रिटेल निवेशकों के हितों की रक्षा हो गई? क्या बैन हटा लेने के निवेशकों के हितों की रक्षा से जुड़े प्रावधानों का पालन हो गया? सेबी ने बैन हटाने का तर्क देते हुए कहा कि उसके अंतरिम आदेश के पैराग्राफ 59 से 61 तक में दिए गए सेक्शन ‘सुविधा का संतुलन’ के तहत दिए गए निर्देशों का पालन हो गया है। इसलिए “जेन स्ट्रीट ग्रुप द्वारा इंडेक्स मैनुपुलेशन के मामले में अंतरिम आदेश के पैरा 62.11 के अनुसार क्लॉज़ 62.1 के निर्देशों के पालन (सेबी के पक्ष में ₹48,43,57,70,168/- का एस्क्रो खाता खोलने) के बाद अंतरिम आदेश के क्लॉज़ 62.2, 62.3, 62.4, 62.5, 62.7, 62.8 और 62.10 लागू नहीं होंगे।” आखिर सेबी का यह ‘सुविधा का संतुलन’ क्या है? अब मंगलवार की दृष्टि…
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