वाणिज्य मंत्रालय से जुडे व्यापार उपचार महानिदेशालय (डीजीटीआर) ने सिफारिश की थी कि चीन से आयात हो रहे स्टील उत्पादों पर पांच सालों के लिए 18.95% काउंटरवेलिंग ड्यूटी (सीवीडी) लगा दी जाए ताकि घरेलू स्टील उद्योग को बचाया जा सके। लेकिन वित्त मंत्रालय ने इनकार कर दिया। उसका कहना है कि इससे भले ही देशी स्टील निर्माताओं को नुकसान हो, लेकिन स्टील उपभोक्ता भारतीय फर्मों को फायदा होगा। सवाल उठता है कि जब सारी दुनिया के देश अपने उद्योग को बचाने को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं, तब भारत सरकार चीन के हितों को क्यों तवज्जो दे रही है? वह भी तब, जब सरकारी व निजी क्षेत्र की 170 से ज्यादा स्टील कंपनियां फरवरी 2022 से ही चीन से हो रहे स्टील आयात पर सीवीडी लगाने की मांग कर रही हैं। यह भी विकट सच है कि भारत के लौह अयस्क का 80% हिस्सा चीन आयात करता है और उससे स्टील बनाकर वापस भारत को बेच देता है। तब स्वदेशी के जाप का मतलब क्या है? अब शुक्रवार का अभ्यास…
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