हमारी नजरों में चढ़े हो तभी तो इतने बड़े हो। समझ बदल गई, अहसास बदल गया और हमने अपनी नजरों से गिरा दिया तो कहीं के नहीं रहोगे भाई। फिर काहे इतना इतराते हो, शान बघारते हो!और भीऔर भी

यहीं थोड़ी दूर कहीं हमारा बचपन खेल रहा होगा। पड़ोस में कहीं हमारा बुढ़ापा खांस रहा होगा। देखना चाहें तो अपना अतीत व भविष्य अपने ही इर्दगिर्द देख सकते हैं। हम क्या थे, क्या बनेंगे, समझ सकते हैं।और भीऔर भी